आरबीआई ने रोका 3 बैंकों के प्रमुख के करोड़ों का बोनस

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देश की बैंकिंग रेगुलेटरी आरबीआई ने देश के तीन प्राइवेट बैंक्स ICICI, HDFC और AXIS बैंक के प्रमुखों का बोनस रोक दिया है।

क्या है वजह?

देश की बैंकिंग रेगुलेटरी आरबीआई की तरफ से निजी बैंकों के प्रमुख को मिलने वाला बोनस में देरी की जारी है चीन बैंक प्रमुख का बोनस रुका हुआ है उनमें HDFC के आदित्य पुरी ,आईसीआईसीआई बैंक की चंदा कोचर और Axis Bank की शिखा शर्मा का बोनस रोक दिया है।

आरबीआई ने बैंक के प्रदर्शन के बात करते हुए बैंक के प्रमुख को बोनस के रूप में मिलने वाला रकम के भुगतान पर सवाल उठाया है ब्लूमबर्ग मैं जा रही एक रिपोर्ट के अनुसार यह बोनस तीनों बैंक के के प्रमुख 29 मार्च 2017 को खत्म हुए वित्त वर्ष के अंत में मिलने वाला था । आरबीआई की तरफ से बोनस के तौर पर दी जाने वाली रकम पर हस्ताक्षर नहीं किया गया।

इन बैंकों के प्रमुख को कितना- कितना बोनस मिलने वाला था?

अगर मीडिया रिपोर्ट की मानें तो ICICI Bank किसी और चंदा कोचर को 2.2 करोड़ रुपए या नहीं 3.40 लाख अमेरिकी डॉलर के बोनस की मंजूरी हुई है. वही Axis Bank की सीईओ शिखा शर्मा को 1.35 करो रुपए बोनस के रूप में मिलना है. अगर HDFC बैंक के CEO की बात करें तो उन्हें 2.9 करो रुपए का बोनस मिलने का प्रस्तावित किया गया है किस बारे में केंद्रीय बैंक किया अन्य किसी भी बैंक की तरफ से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

आपको बता दें कि निजी बैंक की फाइनेंसियल कंडीशन सरकारी बैंकों की तुलना में बेहतर बताई जाती है. पिछले कुछ सालों से बैंक में खराब लोन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस में कमियों के कारण निजी बैंकों के हालत पर प्रश्नचिंह लगा है.दूसरी तरफ ICICI और वीडियो अकाउंट ग्रुप के बीच लोड दिल के सामने आने के बाद चंदा कोचर के पति और देवर की मुश्किलें बढ़ी हुई है हालांकि बैंक की तरफ से चंदा कोचर पर भरोसा जताया गया है.

अगर वही आरबीआई की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार बात करें तो Axis Bank में पिछले दि 5600 करोड रुपए के बैड लोन का खुलासा नहीं किया इसके अलावा HDFC बैंक की तरफ से बैड लोन के बारे में दी गई जानकारी में भी अंतर हैइस मामले पर ICICI बैंक का कहना है कि इस मामले की जानकारी देना जरूरी नहीं है तीनों बैंकों के प्रमुख को जो बोनस मिलता है वह मार्च 2017 को समाप्त हुए फाइनेंसियल ईयर का है.

एनपीए या बैड लोन क्या होता है?

अगर आपको सरल शब्दों में समझाया जाए तो जब बैंक किसी व्यक्ति को लोन देती है तो कभी-कभी ऐसा होता है कि लोन लेने वाला इंसान बैंक को रेगुलर पेमेंट नहीं कर पाता है. तब इस परिस्थिति में बैंक उसे एक नोटिस भेजती है कि भाई तुम अपना देख लो नहीं तो तुम्हारे खिलाफ लीगल एक्शन लिया जाएगा. फिर भी वह आदमी बैंक के पैसे देने में सक्षम नहीं होता है या फिर पैसे नहीं दे पाता है. तब उसके खिलाफ बैंक ने क्या एक्शन लिया इसी कारण से उसका लोन अकाउंट एनपीए हो जाता है जिसे नान परफॉर्मिंग एसेट भी कहते हैं।