एक सफर आत्मा के साथ

डरावनी कहानियां

जिंदगी में अक्सर ऐसी घटनाएं हो जाती है, जिन पर विश्वास करना नामुमकिन सा लगने लगता है। ऐसे ही एक घटना उन दिनों की है जब मैं कॉलेज में पढ़ा करता था।

यह घटना मुझसे तो जुड़ी हुई नहीं है, लेकिन जाने अनजाने में, मैं भी इस घटना से किसी ना किसी रूप से जुड़ा हुआ सा महसूस करता हूं।

कॉलेज का वह दिन जब सुबह 8:30 बजे की क्लास पकड़ने के लिए, जल्दी जल्दी तैयार होकर लेक्चर अटेंड करने के लिए हम लोग अपने कॉलेज सन जेवियर कॉलेज रांची के लिए तैयार हो रहे थे। मुझे कहीं ना कहीं उस दिन अजीब सा लग रहा था। चलो हम सभी दोस्त सही वक्त पर कॉलेज तो पहुंच गए और सभी ने 8:30 बजे की क्लास अटेंड भी की। हम लोगों ने क्लासेस बंक करके मूवी देखने का प्लान बनाया। सो लगभग 2:00 बजे का था। हम सारे दोस्त क्लासेज बंक करके 2:00 बजे का शो देखने चले गए।

मूवी हाफ एंड तक पहुंची थी, कि मेरे दोस्त स्टेफेन के सेल फोन पर फोन आया। शायद दूसरी तरफ उसके पापा लाइन पर थे, कुछ देर बाद मैंने अपने दोस्त को पूछा अरे यार क्या हुआ?

उसने जवाब देते हुए कहा,” पापा का फोन था, उन्होंने कहा कि मां की तबीयत बहुत ही खराब है बेटा! तुम जल्दी से जल्दी घर वापस आ जाओ”

उसके बाद क्या था हम लोग सिनेमा हॉल से सीधे अपने हॉस्टल वापस वापस आ गए। स्टीफन अपने घर की ओर जाने के लिए अपनी पैकिंग वगैरा करने में लग गया। हम लोग उसे बस स्टैंड पर छोड़ने के लिए चले गए लेकिन वहां जाकर पता चला की आखिरी बस 4:30 बजे बस स्टैंड से निकल चुकी है। रांची से गुमला के लिए आखिरी बस 4:30 बजे की ही थी। अब हमारे पास में दो ही साधन उपलब्ध थे, या तो किसी कार को बुक करके वहां पहुंचा जाए, या बाइक से ही गुमला की ओर चला जाए।

स्टीफन ने निराश में मुझे कहा कि दोस्तों अपना बाइक दे दो मुझे, अब लगता है बाइक से ही जाना पड़ेगा। मैंने भी उसकी मजबूरी को देखते हुए कहा कि मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगा।

हमारे डिसीजन लेते लेते अब तक 5:30 बज चुके थे और अंधेरा भी होने को आया था। सो हम दोनों बाइक से गुमला के लिए लगभग 5:45 पर रांची से रवाना हुए। यह नवंबर का महीना था, सर्दियां शुरू होने वाली थी। शाम के वक्त हल्की ठंड सी हवा साए साए बह रही थी।

रास्ता लंबा था, दिन भी ढल चुका था। लंबी दूरी तय करना था। रांची के ट्रैफिक को पार करते हुए हम लोग बेड़ो लगभग 7:00 बजे आस पास पहुंचे होंगे। वह एक छोटी सी पान की दुकान में हम लोगों ने चाय पानी नाश्ता किया, फिर अपनी मंजिल की ओर निकल पड़े। यह उन दिनों की बात है जब उस रूट पर गाड़ियां भी काफी कम चला करती थी।

बेड़ो से कुछ दूर जाने के बाद, एकदम सुनसान रास्ते में एक व्यक्ति लिफ्ट मांगने के लिए खड़ा था। हमारी बाइक में जगह नहीं होने के बावजूद हम लोगों ने उसे अपनी बाइक में बैठा लिया। उसे शायद चोट लगी हुई थी। हम लोगों ने उससे पूछा कि भैया आपको यह चोट कैसे लगी? उसने जवाब देते हुए कहा कि एक छोटा सा एक्सीडेंट हो गया था, जिसमें मुझे यह चोट आ गई है।

चलते चलते उसने हमसे पूछा कि आप लोग कहां जा रहे हैं, मैंने कहा कि,’ मेरी दोस्त की मां की तबीयत खराब है, इसीलिए हम लोग गुमला जा रहे हैं। इसके बाद उस व्यक्ति ने आगे बताते हुए कहा,’ तुम लोग चिंता मत करो तुम्हारी मां की तबीयत एकदम ठीक है, स्टीफन,’ तुम्हारे पिता आज तुम लोगों के लिए घर में मुर्गी का मीट बना रहे हैं। तुम्हारी दीदी भी घर पहुंच चुकी है। तुम्हारे दीदी को लड़का हुआ है।

जब उस व्यक्ति ने यह सब बातें कहीं तो हम लोग हैरान होकर रह गए थे। जैसे ही पीछे मुड़कर मैंने और कुछ उससे पूछना चाहा तो देखा वह आदमी बाइक से अचानक गायब हो गया था। हम लोग इतना ज्यादा डर गए थे। कि हमारी गाड़ी अब हवा में बात कर रही थी।

गुमला पहुंचते पहुंचते मैंने अपने दोस्त स्टीफन को कहा,’ जिस व्यक्ति को हम लोगों ने लिफ्ट दिया था कहीं वह कोई भूत-प्रेत तो नहीं था, तब स्टेशन ने जवाब देते हुए कहा कि शायद वह व्यक्ति फेंक रहा होगा। ऐसा वैसा कुछ नहीं है तुम बाइक चलाने पर ध्यान दो।

लगभग 8:00 बज चुके थे और हम लोग गुमला पहुंच चुके थे। जैसे ही हम लोग स्टीफन के घर पहुचे, तब उस व्यक्ति द्वारा कही गई हर बात सच हो रही थी। हम लोग डर से इतना सब पकाश आ गए थे। कि हमें अपनी कानों और आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था।

उस रात हमें ठीक से नींद भी नहीं आई। उस व्यक्ति का चेहरा बार बार आंखों के सामने आ रहा था। और उसकी कही बातें बार-बार दिल दिमाग में दौड़ रही थी। जैसे तैसे रात तो कट गई। लेकिन सुबह उठने के बाद हम लोगों ने चाय पीते पीते जब अखबार पलट कर देखा। तो हम लोग एकदम आश्चर्य में पड़ गया, उसमें एक व्यक्ति की फोटो के साथ खबर छपी हुई थी जिस पर लिखा हुआ था, की सड़क दुर्घटना में उस व्यक्ति की मौत हो चुकी है। हमें उस खबर पर यकीन ही नहीं हो रहा था ।

उस घटना के बाद आज तक मुझे यह यकीन नहीं हो पाया है कि ऐसी घटनाएं भी जीवन में घटित होती है। जिसका आपके पास में ना कोई साक्ष्य होता है और ना ही आपका दिल दिमाग उस घटना पर विश्वास कर पाता है।

दोस्तों अगर आप के साथ में भी ऐसी कोई घटना घटी हो तो आप हमें उस घटना के बारे में ईमेल करके बता सकते हैं । हम आपकी उस घटना को अपने वेबसाइट पर जरूर पोस्ट करेंगे।

आप हमें ईमेल कर सकते हैं, trolltopnews@gmail.com

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