खतरनाक वायरस जिसने ली है लाखों लोगों की जान.

विज्ञानं

कुछ दिन पहले Nipah वायरस ने केरल में कई लोगों की जान ले ली थी। यह पहली बार नहीं है कि इस तरह का जानलेवा वायरस फैला है। आज हम आप लोगों को अपने इस लेख में ऐसे ही 3 खतरनाक वायरस के बारे में बता रहे हैं ,जिसने लाखों लोगों की जान ली है।

इबोला(EBOLA) वायरस

इबोला वायरस की महामारी ने पिछले कई सालों में लाखों लोगों की जान ली है। इस वायरस के कहर ने भारत समेत पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था। हर देश से आने वाले और जाने वाले लोगों की एयरपोर्ट पर चेकिंग होने लगी। पूरी मेडिकल जगत का ध्यान इस वायरस की ओर गया और इसके लिए बहुत सी खुशी हुई जिनमें से कुछ आयाम तक पहुंची और कुछ नहीं भी, लेकिन सब जानते कि भारत और पूरे विश्व के देश ने उस समय जब इबोला का कहर सबसे प्रबल था। हर तरफ से मदद करने की कोशिश की थी और मानवता पर आने वाले किसी भी संकट के लिए लोगों ने एकजुटता का संदेश दिया। आज हमें बोला और बोला बारिश के बारे में कुछ जानकारियां आपके साथ साझा करने वाले हैं।

इबोला वायरस (ebola virus) आखिर क्या है?

यह एक तेजी से म्यूटेंट यानी अपनी रचना बदल सकने वाले में सक्षम एक वायरस है। जो व्यक्ति के रक्त संचार प्रणाली पर प्रबल तरीके से हमला करता है। उसे क्षतिग्रस्त करता है। मेडिकल साइंस की भाषा में इसे हेमरेजिक यानी कि रक्त स्राव वायरल बुखार कहा जाता है क्योंकि इबोला से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में से कहीं से भी रक्त का असर हो सकता है और यही रक्त स्त्राव उसका मौत का कारण भी बन सकता है।

इबोला कैसे फैलती है।

इबोला वायरस खुद में एक पहेली की तरह है अभी भी विज्ञानिक के लिए यह एक रहस्य है। क्योंकि यह बहुत तेजी से फैलता है और इसकी लोगों की चपेट में आने से लेकर उन्हें संक्रमित करने की क्षमता अधिक होती है। इसके फैलने का मुख्य माध्यम है लार ,पसीना और वीर्य या आप कह सकते हैं शरीर से निकलने वाले अन्य तरल पदार्थ इसके फैलने का मुख्य माध्यम है। इसके वायरस कोई खासियत ठीक से हवा में फैलने वाले वायरल वायरस की तरह नहीं है। बल्कि यह वायरस बड़ी शातिरता से संपर्क माध्यम से फैलने वाला रोग है। आप इसे साधारण भाषा में छुआ छूत का रोग भी क्या सकते हैं क्योंकि यह रोगी के संपर्क में आने वाले को भी अपनी चपेट में ले लेता है।

इबोला का इलाज मेडिकल साइंस के पास नहीं है

यह एक ऐसा वायरस है जिसका इलाज मेडिकल साइंस के पास भी नहीं है। यह उन नवीनतम वायरसों में से एक है जिनके ऊपर आज भी रिसर्च चल रही है। इस वायरस के बारे में मेडिकल रिसर्च ज्यादा नहीं हुए हैं। इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति के बचने की आशंका 10% है देखा गया है कि 90% से अधिक रोगी इस वायरस के संक्रमण के बाद अपना जान हाथ से खो बैठते हैं। तो आप इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि यह कितना खतरनाक वायरस है।

मारबुर्ग वायरस (MARBURG वायरस) दुनिया का सबसे खतरनाक वायरस

Marburg वायरस का सबसे पहले पता सन 1967 में हुआ था। सन 1967 मैं जर्मनी के शहर Marburg ,Frankfurt और Yugoslav की राजधानी बेलग्रेड मैं इससे संक्रमित लोगों की पहचान की गई थी। सन 2005 में इस वायरस का नाम बदलकर लेक विक्टोरिया marburgvirus कर दिया गया।
इबोला वायरस भले ही खतरनाक वायरस हो सकता है लेकिन Marburg वायरस को दुनिया का सबसे खतरनाक वायरस माना जाता है। इस वायरस को इबोला वायरस या एचआईवी वायरस से भी ज्यादा खतरनाक माना जाता है। क्योंकि इसका संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है। इसके संक्रमण से 90% रोगियों की जान चली जाती है। 10% ही ऐसे मामले देखने को मिलते हैं जिसमें संक्रमित व्यक्ति की जान बचाई जा सकी है।

यह वायरस फिलोविरेडे परिवार के हेमोरेजीक परिवार से संबंधित रखता है। यह भी तो बोलो बारिश की तरह खून में फैलने वाली वायरस है। डब्ल्यूएचओ द्वारा इस वायरस को दुनिया के 4 सबसे खतरनाक वायरस में शामिल किया गया है।

Marburg वायरस कैसे फैलता है?

बेहद खतरनाक माने जाने वाले इस वायरस के फैलने के कई कारण हो सकते हैं। लेकिन मुख्यता इन वायरस को फैलने का माध्यम चमगादड़ों द्वारा खाए गए फल के सेवन के द्वारा यह मनुष्य में फैल सकता है। इसके फैलने का दूसरा माध्यम यह भी हो सकता है कि यदि कोई व्यक्ति के घाव, चोट चपेट, रक्त स्राव जहां से खून बह रहा हो, आदि जगहों में इस वायरस के संपर्क आने से यह लोगों को तुरंत संक्रमित कर देता है। इस वायरस के लक्षण संक्रमित व्यक्ति में एबोला वायरस की तरह ही दिखाई देता है। इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति में डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण प्रारंभिक अवस्था में देखने को मिलते हैं। इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति में से केवल 10% व्यक्ति की जान बच सकती है। अधिकतर मामलों में देखा गया है कि 90% से भी अधिक संक्रमित व्यक्तियों की जान चली गई है।

Nipah Virus जिसने भारत में ली 10 लोगों की जान

निशा वायरस का सबसे पहला मामला सिंगापुर मलेशिया में 1998 और 1999 में देखने को मिला था। यह सबसे पहले सूअर चमगादड़ वन्यजीवों को प्रभावित करता है। और इन सब घरेलू जानवरों के द्वारा मनुष्य में भी संक्रमित होता है। मलेशिया में सबसे पहले इसके लक्षण देखने को मिले थे। जब एक व्यक्ति को इस वायरस ने चपेट में लिया और उसकी मौत हो गई थी। उसी गांव के नाम पर इस वायरस का नाम “NIPAH” वायरस रखा गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ द्वारा इसे भी सबसे खतरनाक वर्षों में शामिल किया गया है।

कैसे फैलता है निपह वायरस?

मनुष्य मैया वायरस संक्रमित जानवर जैसे सूअर चमगादड़ या अन्य संक्रमित जीवो से संपर्क में आने से फैलता है। यह वायरस इंसेफेलाइटिस के कारण बनता है। यह इंसेक्टिसाइड्स बर्ड्स के जरिए लोगों में फैलता है। खजूर की खेती करने वाले लोग इस इन्फेक्शन की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। 2004 में इस वायरस के संक्रमण के कारण बांग्लादेश में कई लोगों की जान चली गई थी।

क्या है इसके लक्षण

इस से पीड़ित मनुष्य को इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के रूप में तेज संक्रमण बुखार, सिर दर्द, मानसिक भ्रम, कोमा और आखिर में मौत होने के लक्षण नजर आते हैं। मलेशिया में इस वायरस से संक्रमित लगभग 50 फ़ीसदी मरीजों की मौत हो गई थी।

कैसे बचे इस वायरस से

मनुष्य में यह वायरस ठीक करने का एकमात्र तरीका है सही देखभाल। रिबावरिंन नामक दवाई वायरस के खिलाफ प्रभावित साबित हुई है। इसके अलावा संक्रमित सूअर चमगादड़ व अन्य संक्रमित जीवो से दूरी बनाए रखें। हालांकि मनुष्य जानवरों के लिए कोई विशिष्ट एनआईबी उपचार या टिका नहीं मौजूद है।

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