टेलीफोन नेटवर्क की दुनिया में क्रांति 3G और 4G के बाद अब 5G वायरलेस टेक्नोलॉजी

विज्ञानं

टेलीफोन नेटवर्क की दुनिया में क्रांति आ रही है। यह क्रांति पुराना नहीं बल्कि हमारे जीवन में नया है पहले 3G आया फिर 4G और अब दुनिया 5G वायरलेस टेक्नोलॉजी में कदम रखने जा रही है

मनुष्य का जीवन हमेशा से परिवर्तनशील रहा है। बहुत पुराने समय से ही अपने संदेशों को भेजने के लिए कभी कबूतर तो कभी किसी कोई और साधन का उपयोग करता रहा है। जैसे जैसे विज्ञान ने प्रगति की वह समय से उसके संचार के साधन भी विकसित होते चले गए। और इस तरह से दुनिया में टेलीफोन का विकास पर अविष्कार हुआ। इसका इस्तेमाल एक स्थान से दूसरे स्थान पर संदेशों को पहुंचाने के लिए किया जाता रहा है। शुरुआत में यह टेलीफोन काफी बड़े और जटिल यांत्रिक प्रक्रिया के बने होते थे। लेकिन जैसे-जैसे विज्ञान ने तरक्की की वैसे वैसे इनमें भी तरक्की होती चली गई। आज के आधुनिक युग में हम यह देख सकते हैं कि किस प्रकार मोबाइल फोन और स्मार्टफोन में तरक्की हुई है। एक समय ऐसा था जब मानव के पास संचार सुविधा का अभाव था लेकिन पहले फोन अब मोबाइल ने मानव को एक बहुत ही उपयोगी संचार सुविधा प्रदान की है। मोबाइल फोन तकनीक मैं कुछ ही वर्षों के समय में सारे विश्व में और हाल के कुछ वर्षों में भारत और चीन में आश्चर्यजनक ऊंचाइयों को छुआ है। मोबाइल संचार सेवा में पिछले कुछ वर्षों में इतनी तेजी से बदलाव आया है कि इन्हें पीढ़ियों यानी जेनरेशंस का नाम दे दिया गया। भारत में संचार सेवाओं की चौथी पीढ़ी ने प्रवेश किया है चौथी पीढ़ी से मतलब है 4जी सेवाओं से। इससे पहले भारत में पहली पीढ़ी यानी 1जी दूसरी पीढ़ी अर्थात 2जी और 3जी मोबाइल सेवाएं उपलब्ध थी।

फर्स्ट जनरेशन 1G ( पहली पीढ़ी)

आप हम और पिछले कुछ पीढ़ियों ने जरूर 1जी सेवाओं का आनंद उठाया होगा। यह वह समय था जब पहली बार टेलीफोन नेटवर्क में क्रांति आई थी। उस समय टेलीफोन नेटवर्क अपने विकास के पहले चरण में था। पहली पीढ़ी या फर्स्ट जनरेशन अर्थात 1 जी के संचार नेटवर्क एक कम बैंडविथ वाले एनालॉग संचार नेटवर्क है। साधारण भाषा में कहा जाए तो यह वह नेटवर्क था जिनके जरिया आवाज और लिखित संदेशों का आदान प्रदान किया जाता रहा। ये सर्किट स्विचिंग के साथ उपलब्ध होती है, कोई भी नंबर डायल करने पर कॉल के सक्रिय होती है इसकी प्लस की गिनती शुरू हो जाती है और कॉल के खत्म होते ही यह सब समाप्त हो जाता है। 1G की सेवाओं की सबसे बड़ी कमी इसके लिए प्रयोग किए जाने वाले यंत्रों का आकार मैं बहुत बड़ा होना था इसलिए प्रारंभ में इन्हें केवल कार आदि में ही लगाया जा सकता था आज की तरह आधुनिक युग में जेब में रखना असंभव था।

दूसरी पीढ़ी या सेकंड जेनरेशन अर्थात 2G

जैसे से विज्ञान और तरक्की करती गई वैसे वैसे संचार के साधनों में भी तरह की होती चली गई। 1जी के बाद टेलीकॉम नेटवर्क के क्षेत्र पर 2G सेवाओं का विकास हुआ। 2G के संचार नेटवर्क बिकम बैंडविथ के संचार नेटवर्क है। लेकिन इनकी खास विशेषता यह है कि यह डिजिटल प्रौद्योगिकी पर आधारित है इसीलिए इस पद्धति से भेजे गए संदेश के आदान-प्रदान की गति में वृद्धि हो जाती है। 2G नेटवर्क मुख्यता ध्वनि सेवा और स्लो डेटा ट्रांसमिशन के लिए बनाए गए थे। सेल्यूलर प्रद्योगिकी की विशेषता यह है कि जिस स्थान पर इसका उपयोग किया जाता है उस स्थान को छोटे-छोटे शहरों में विभाजित कर दिया जाता है जिससे एक ही आवर्ती का प्रयोग बार-बार किया जा सकता है और लाखों लोग एक ही समय में मोबाइल फोन का प्रयोग कर सकते हैं। डिजिटल सिस्टम का एक लाभ भी हुआ किसी भी स्थान में बहुत अधिक सेलों को विकसित किया जा सकता था। इस सेल टावर से संबंधित उपकरणों पर होने वाले खर्चे में भी कमी आई। हालांकि कम बैंडविथ के नेटवर्क होने के कारण वन जी के नेटवर्क की तरह इनमें भी अधिकतम बैंडविथ का उपयोग करना पड़ता था। GPRS की सुविधा दोनों ही नेटवर्क 1G और 2G दोनों में ही उपलब्ध नहीं है । लेकिन 1G नेटवर्क की तुलना में 2G नेटवर्क की रेंज आवश्यक बढ़ जाती है। क्योंकि 1 जी की सेवाएं केवल एक देश तक ही सीमित रहती है बल्कि 2G की सेवाएं लगभग आधे विश्व में उपलब्ध हो जाती है। हाई फ्रीक्वेंसी वाले 2G सिस्टम में एक विशेष समस्या यह आती है कि कम आबादी वाले क्षेत्र में कमजोर डिजिटल संकेत सेल टावर तक नहीं पहुंच पाते हैं जबकि कम फ्रीक्वेंसी वाले 2G सिस्टम में ऐसा नहीं होता था। वही डिजिटल कॉल का एकलव्य भी है कि आस-पास और है सर का फोन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। 2G सिस्टम लगाए जाने में संबंधित नियम सभी देश दुनिया में भिन्न-भिन्न है।

2G प्रौद्योगिकी के बाद जो तकनीक बाजार में आए उसे 2.5 जी कहा गया। इसे 2G और 3G सेल्यूलर वायरलेस तकनीक के बीज का चरण भी कहा जाता है। लेकिन इस तकनीक से कुछ विशेष लाभ नहीं हो पाया इसलिए या अधिक प्रचलित नहीं हो पाई ऐसा ही कुछ 2.75 जी के साथ भी हुआ जैसे अर्थात ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशन नेटवर्क के विकास में पहला महत्वपूर्ण मोर जनरल पैकेट रेडियो सर्विस अर्थात GPRS के प्रवेश के साथ आया। इसके अतिरिक्त इसका उपयोग वायरलेस एप्लीकेशन प्रोटोकॉल या नहीं वह टेक्स्ट मल्टीमीडिया मैसेज इन यानी MMS और इंटरनेट कम्युनिकेशंस सर्विस जैसे कि ईमेल और वर्ल्ड वाइड वेब एक्सेस के लिए भी हो सकता था। इस प्रकार 2G तकनीक की सभी सुविधाओं को 3जी तकनीक द्वारा बदल पाना संभव हो सका।

थर्ड जनरेशन या तीसरी पीढ़ी अर्थात 3G

इसके बाद मोबाइल टेलीकॉम नेटवर्क के क्षेत्र में क्रांतिकारी चरण आया जब 3G नेटवर्क एक अधिक बैंडविथ का नेटवर्क में विकास हुआ। इसके जरिए भेजो जाने वाले आवाज और लिखित संदेश की गुणवत्ता में सुधार आया इस तकनीक में ध्वनि भेजने के लिए सर्किट स्विचिंग का प्रयोग किया जाता है वह लिखित संदेश एवं डाटा भेजने के लिए पैकेट स्विचिंग का प्रयोग किया जा सकता था।

इंटरनेशनल टेलीकम्यूनिकेशन यूनियन द्वारा वर्ष 2000 में बनाए गए इंटरनेशनल मोबाइल कम्युनिकेशन नियमों के अनुसार 3G नेटवर्क के सर्विस प्रोवाइडर के लिए कम से कम 200 किलोबाइट 25 सेकंड वीक बाय ट्रेन की गति से सेवा प्रदान करने की क्षमता होना आवश्यक होता है। 3G तकनीक के लिए मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां ऊंची से ऊंची कीमत देने को तैयार है। वास्तव में 3G तकनीक मोबाइल परिवार की तीसरी पीढ़ी का एक ऐसा मानक है जिसमें g s m, u m t ,s e d g i, c d m s, d ic t r, y -Max जैसे आधुनिकतम तकनीक समाहित है। दूसरे शब्दों में अगर कहा जाए तो 3G तकनीक पर काम करता है जो डिजिटल वायरलेस नेटवर्क पर बढ़ी हुई सामर्थ्य एवं धारिता देने की क्षमता रखती है। पहला व्यवसायिक 3G नेटवर्क अक्टूबर 2001 में एनटीटी डोकोमो ने जापान में लांच किया था जो W-CDMS तकनीक पर काम करता था। इसके बाद दक्षिण कोरिया और यूरोप होते हुए या तकनीक अक्टूबर 2003 में अमेरिका पहुंची और दिसंबर 2007 आते-आते विश्व के 40 देशों में 190 3G नेटवर्क काम करते थे।

सन 2008 में भारत संचार निगम लिमिटेड अर्थात BSNL द्वारा भारत में पहली बार 3G आधारित मोबाइल सेवाओं की शुरुआत हुई। यह सेवा सबसे पहले बिहार से आरंभ की गई थी इसके बाद MTNL ने मुंबई और दिल्ली महानगरों में 3G आधारित सेवाएं आरंभ की। वर्ष 2010 में भारत में मोबाइल फोन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस वर्ष अप्रैल 2010 में 3G तकनीकी की नीलामी की गई। इस तरह अन्य टेलीकॉम ऑपरेटरों को अब अपने ग्राहकों को 3जी सेवा देने की पहल शुरू हुई।

3G यह थर्ड जनरेशन ऑफ वायरलेस टेक्नोलॉजी विदेशों में तो पहले से ही संचार का प्रचलित माध्यम है। भारत का MP3 जी की सहायता से ध्वनि daata जैसे ईमेल तत्काल मैसेजेस और सूचना डाउनलोड करना आदि सब एक साथ करना संभव हो पाया है। 3G और कुछ नहीं बल्कि पहले से ही मौजूदा तकनीक का परिवर्तित रूप है। हाई स्पीड डाटा ट्रांसफर, उन्नत मल्टीमीडिया एक्सेस और यूनिवर्सल रोमिंग जैसी सुविधाएं तो पहले से ही उपलब्ध थी लेकिन आप 3G से वीडियो प्रसारण स्टॉक एक्सचेंज ई लर्निंग और टेलीमेडिसिन जैसे डाटा इंटेंसिव सेवाएं भी उपलब्ध होने लगी है। जीन मोबाइल फोन पर यह सुविधा उपलब्ध होती है उन्हें स्मार्टफोन या iPhone भी कहते हैं।

फोर्थ जनरेशन या चौथी पीढ़ी अर्थात 4जी

जॉकी हाई परफॉर्मेंस अनुप्रयोग जैसे मल्टीमीडिया फुल मोशन वीडियो वायरलेस टेलीकांफ्रेंसिंग की जरूरतों को पूरा करने के लिए 3G सेवाएं काफी नहीं थी इसलिए 4जी की जरूरत पड़ी। 4G वायरलेस तकनीक को मैजिक भी कहते हैं जो 72 संचार की चौथी पीढ़ी है जिसका अर्थ है मोबाइल मल्टीमीडिया कहीं भी ग्लोबल मोबिलिटी इंटीग्रेटेड वायरलेस और कस्टमर सर्विस।

चौथी पीढ़ी के मोबाइल तकलीफ सेल फोन और टैबलेट जैसे युक्तियों में ब्रॉडबैंड इंटरनेट एक्सेस प्रदान करने के लिए स्टैंडर्ड का सेट है सबसे पहले अमेरिका में 2009 में उपलब्ध हुई लेकर 2011 तक किसी भी तकनीक को अधिकारिक तौर पर 4जी नाम नहीं दिया गया इसके बावजूद अनेक युक्तियों को 4जी का नाम दिया गया। इसमें और पूर्व स्टैंडर्ड्स में जो सबसे बड़ा अंतर था हुआ था डेटा स्थानांतरण गति और मीडिया के प्रकार जिन्हें लोग इससे एक्सेस कर सकते थे। इसके अतिरिक्त अनेक तकनीक विशेषताएं भी है जैसे कि वायरलेस स्टैंड ,रेडियो इंटरफेरेंस पर प्रयोग किए गए फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम। 2011 में केवल दोहे तकनीकों को अधिकारिक तौर पर 4जी मोबाइल सेवा का नाम दिया गया एलटीई एडवांस(LTE-Advance) और वाईमैक्स रिलीज 2(WiMax) को।

जहां भारत में भी 4जी तकनीक का प्रवेश हुआ है वही विश्व के अनेक विकसित देश 7 जी तक पहुंच चुके हैं। अनेक नवीन विशेषताओं से लैस इस तकनीकी एक विशेषता है इसमें 5 से 20 मेगाहर्ट्ज की बैंडविथ बल्कि यहां 40 मेगाहर्ट्ज तक हो सकती है। इसके कुछ अन्य विशेषताएं हैं विश्व के किन्ही दो स्थान के बीच न्यूनतम 2 मेगाबाइट प्रति सेकेंड का डाटा रेट भिन्न भिन्न प्रकार के नेटवर्कों के बीच बिना किसी बाधा के समान रुप दा ग्लोबल वॉर्मिंग अगली पीढ़ी के मल्टीमीडिया सपोर्ट के लिए उत्तम गुणवत्ता की सेवा वर्तमान एवं मानक वायरलेस नेटवर्क के बीच इंटर पोर्टिबिलिटी तथा सभी इंटरनेट फोटो खोलो में पैकेट स्विचिंग।

4जी तकनीक का सबसे बड़ा लाभ है 3G प्रौद्योगिकी की तुलना में डाउनलोडिंग की दुगनी गति तक पहुंचना चाहे वह वीडियो हो अथवा लिखित सामग्री सभी कुछ कुछ ही पलों में डाउनलोड किया जा सकता है। यदि 4जी के मोबाइल को यूएसबी केबल द्वारा इंटरनेट से जोड़ दिया जाए तो यात्रा के दौरान इंटरनेट भी मोबाइल की तरह काम करने लगेगा। लेकिन 4जी को बाजार में लाने में सबसे बड़ी चुनौती थी सही एप्लीकेशन प्रोसेसर के साथ-साथ मॉडेम और पावर प्रबंधन तकनीक जैसे उपभोक्ताओं की मांग के अनुसार आकार निष्पादन आकार और बैटरी लाइफ प्रदान की जा सके। 4जी कॉल आने का रास्ता साफ हुआ तो भविष्य में वायरलेस तकनीकों का मार्ग भी खुल जाएगा।

आज भारत में लगभग सभी बड़ी टेलिकॉम ऑपरेटर कंपनियां भारत में 4G सेवाएं प्रदान कर रही है। जैसे कि रिलायंस जिओ, Airtel ,Videocon Vodafone ,Idea आदि।

फिफ्थ जनरेशन या पांचवी पीढ़ी अर्थात 5जी

जसरासर समय का चक्र कभी रुकता नहीं है कुछ इसी तरह से मोबाइल टेलीफोन नेटवर्क तकनीक प्रगति की भी कोई सीमा नहीं है। भारत में अभी 4जी तकनीक स्थापित वह भी नहीं पाई थी कि विश्व में 5G भी स्थापित हो चुकी है। वर्तमान में 5जी पर अनुसंधान जारी है जिसमें डाटा की दर और बढ़ जाएगी। 5जी मोबाइल फोन के उपयोग में और परिवर्तन आएंगे, डेस्कटॉप और लैपटॉप तो संभवत पूरी तरह से विस्थापित ही हो जाएंगे। स्मार्ट सांसदों के क्षेत्र में हो रहे इनोवेशन के साथ अत्यंत उच्च डाटा दर IP को विश्वव्यापी कवरेज वाले 5जी मोबाइल फोनों में ऐसे फीचर्स होंगे हम जिनके अभी कल्पना भी नहीं कर सकते। इतना ही नहीं यह मोबाइल सेवाएं और भी अधिक विकसित होती जा रही है विज्ञानिक तो छठी और सातवीं और आठवीं पीढ़ी तक लाने के लिए आतुर और उत्साहित दिख रहे हैं। अब वह दिन दूर नहीं जब हम इतनी तेजी से एक संचार क्रांति मे और अधिक विकास और प्रगति करने वाले हैं।

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