डीजल और पेट्रोल के दाम आसमान की ऊंचाई पर

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हो जाएं तैयार अभी और महंगा होने वाला पेट्रोल -डीजल इन कारणों से बढ़ेंगे पेट्रोल और डीजल के दाम

भारत और पेट्रोल और डीजल के दाम रिकॉर्ड तोड़ आसमान की ऊंचाई को छू रहे हैं .अभी तक दिल्ली में पेट्रोल 4 महीने के सबसे उच्चतम स्तर पर है तो वहीं डीजल रिकॉर्ड तोड़ ऊंचाई पर पहुंच चुका है. अगर सरकार के निर्णय को देखें डीजल और पेट्रोल को जीएसटी से अलग रखा गया है इसके बावजूद डीजल एवं पेट्रोल के दाम लगातार आसमान की ऊंचाई छू रहे हैं. सरकार इसको लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई है. आज के भाव के मुताबिक पेट्रोल 73.5 ₹ रुपए प्रति लीटर तो वहीं टी-शर्ट 64.5 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है. वही अंतरराष्ट्रीय रेलवे स्टेशन देशों के निर्यातक संगठन और एक और उसने उत्पादन और कटौती का फैसला किया है साला कुछ महीनों में तेल के दाम और बढ़ने की आशंका बताई जा रही है.

कच्चे तेल के दामों में आया है उछाल

वर्ष 2017 में कच्चे तेल का औसत दाम 47.6 डॉलर प्रति बैरल था. जो अप्रैल माह में 2018 में बढ़कर 76.72 प्रति बैरल हो गया है. रेल मंत्रालय की पेट्रोलियम योजना एवं विशेषण शाखा के अनुसार कच्चे तेल का औसतन दम एक माह में  63 दशमलव $80 से 76.4 $ प्रति बैरल के साथ $13 बढ़ चुका है।

सबसे बड़ा तेल उत्पादक रूस और ऑफ एक्ने कच्चे तेल के रोजाना उत्पादन में करीब 2 फ़ीसदी की कटौती का फैसला किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि व्यापार युद्ध और कोरियाई देशों में तनाव कम होने से भी कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा हो सकता है. अगर कच्चा तेल महंगा होता है तो पेट्रोल डीजल के भाव पर भी तेजी आएगी.

तेल क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी से क्षेत्र में उत्पादन बढ़ने से थोड़ी राहत है लेकिन दाम $90 प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं . वहीं जुलाई 2009 में कच्चे तेल के अंतर्राष्ट्रीय दाम $147 प्रति बैरल पर थे इसके केंद्र और राज्य सरकारों पेट्रोल डीजल पर टैक्स में कटौती का दबाव बढ़ गया है.

कैसे तय होती है तेल की कीमतें

भारत में लगभग 80% तेल का आयात किया जाता है अंतरराष्ट्रीय स्तर कच्चा तेल प्रति बैरल के हिसाब से खरीदा और बेचा जाता है. 1 बैरल में तकरीबन 162 लीटर कच्चा तेल होता है.

जिस कीमत पर हम पेट्रोल खरीदता है उसका करीब 48% उसका बेस यानि , आधार मूल्य होता है. इसके अलावा करीब 35 फ़ीसदी एक्साइज ड्यूटी करीब 15 फ़ीसदी सेल्स टैक्स और 2 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लगाई जाती है. तेल का आधार मूल्य कच्चे तेल की कीमत प्रोसेसिंग चार्ज और कच्चे तेल को शोधित करने वाली रिफाइनरियों का चार्ज शामिल होता है.

राज्यों द्वारा लिए जाने वाला बिक्रीकर ही विभिन्न राज्य में पेट्रोल की कीमत के अलग अलग होने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है. यही वजह है कि अलग-अलग राज्य जैसे मुंबई में पेट्रोल दिल्ली की तुलना में महंगा है क्योंकि दिल्ली में बिक्री कर कम है और इसी वजह से अलग-अलग शहरों में तेल की कीमतें भी कम ज्यादा होती है. विभिन्न राज्यों में यह विक्रीकर या वेट 17% से लेकर 37% तक है.

आपको बता दें कि भारत में पेट्रोल की कीमतों का नियंत्रण सरकार नहीं करती बल्कि कंपनियां करती है पर डीजल और केरोसिन और रसोई गैस की कीमतों पर भी सरकार का ही नियंत्रण है और इस पर सरकार सब्सिडी देती है.

पेट्रोल डीजल कीमतें बढ़ने पर हंगामा करने वाली सरकार सत्ता पर आने पर चुप है

दरअसल मोदी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गठित तेल की कीमत का लाभ होता को नहीं दिया है बल्कि गठित तेल की कीमतों के साथ ही मोदी सरकार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाती रही है और पिछले 3 वर्षों में 1 लीटर पेट्रोल पर करीब ₹12 सिर्फ एक्साइज टैक्स मैं बड़ा दिए हैं. अगर देखा जाए तो सरकारी कंपनियों को तेल लगभग 27 से ₹35 के बीच में मिलता है जिसमें परिवहन और दूसरे खर्च लगभग ₹3 75 पैसे और गरीब ₹21. 50 केंद्रित कर मिलाकर यह करीब 52 रुपए 50 पैसे का हो जाता है. जिसमें डीलर का कमीशन 3 दशमलव ₹25 और स्टेट टैक्स और शेष करीब ₹15 लगने के बाद इसकी कीमत ₹70 के पार हो जाती है और कुछ राज्य और अधिक टैक्स के कारण इसकी कीमत ₹80 के पार हो चुकी है. पेट्रोल और डीजल को जीएसटी से बाहर रहने के कारण या केंद्र और राज्यों की कमाई का सबसे बड़ा जरिया बन गया है लेकिन आग में घी का काम तो मोदी सरकार की एक्साइज ड्यूटी ने किया है.

भारत में पड़ोसी देशों के मुकाबले पेट्रोल और डीजल के दाम सबसे अधिक हैं और इसका कारण है क्योंकि मोदी सरकार मानती है कि भारत अपने सभी पड़ोसी देशों से अधिक विकसित है इससे सरकार को अधिक वसूली का अधिकार है. विपक्ष को चारों खाने चित करना और जनता के रोग से बचने के लिए मोदी सरकार ने पिछले कुछ दिनों से प्रतिदिन पेट्रोल और डीजल के रेट तय करने शुरू किया है और इसी दौरान पेट्रोल और डीजल के भाव ₹10 प्रति लीटर तक बढ़ गया है और किसी को कानो कान खबर नहीं हुई. अब जब आम जनता पर इसका असर दिखना शुरु हो गया है तब तो लाखों करोड़ों रुपए सेवा रेडी हो रहे हो चुके हैं सरकार का दावा है कि पेट्रोल डीजल के दाम पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है और यह भी सही है लेकिन पेट्रोल उत्पाद पर टैक्स के नाम पर जो वसूली हो रही है व केंद्र सरकार और राज्य सरकार के नियंत्रण में है और तेल की घाटी कीमतों का लाभ उपभोक्ता को ना देकर सरकार उनसे छल कर रही है.  अब तो सरकार के मंत्री ठोक कर कह रहे हैं कि गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के लिए ऐसा करना अनिवार्य है लेकिन वह यह नहीं जानते कि पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने पर सबसे ज्यादा मार गरीबों को ही पड़ती है.