तंबाकू के सेवन से हो सकती है बहुत सी बीमारियां, अंतर्राष्ट्रीय तंबाकू निषेध दिवस विशेष

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तंबाकू के सेवन से बहुत सी बीमारियों का खतरा बना रहता है अंतर्राष्ट्रीय तंबाकू निषेध दिवस पर विशेष लेख।

धूम्रपान और तंबाकू का सेवन एक ऐसी लत है जो धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के साथ-साथ उसके बाल बच्चों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव असर करता है। हालांकि धूम्रपान करने वाले हर व्यक्ति को स्वीकारते हैं कि धूम्रपान उसकी सेहत के लिए हानिकारक है इसके बावजूद भारत जैसे विशाल देश में धूम्रपान का प्रचलन बढ़ा है।

तंबाकू का उपयोग कैंसर फेफड़ों की बीमारियां और कार्डियो स्कॉलर बीमारियों के सहित कई पुरानी बीमारियों के लिए मुख्य जोखिम कारक साबित होते हैं। नए राष्ट्रीय स्वास्थ्य आंकड़ों के मुताबिक हम भारतीयों ने एक दशक पहले 2015 16 में तंबाकू का इस्तेमाल किया था लेकिन चीन केवल उपभोक्ता करता है और अधिक तंबाकू पैदा करता है कैंसर की दर को उच्च रखता है। भारत में तंबाकू की खपत मिजोरम मेघालय मणिपुर नागालैंड त्रिपुरा असम के छह उत्तर पूर्वी राज्यों में सबसे ज्यादा है। इन राज्यों में औसतन 70.7 प्रतिशत पुरुष तंबाकू का सेवन करते हैं और वहीं यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से 26% अधिक है।

तंबाकू का सेवन और इसका उपयोग गन्ने में मिजोरम उत्तर पूर्वी राज्यों में सबसे ऊपर है यहां लगभग 80.4 प्रतिशत पुरुष और 59.2 प्रतिशत महिलाएं 15 से 49 वर्ष के बीच की सबसे ज्यादा तंबाकू का सेवन और उपयोग करते हैं। अगर भारत में सबसे ज्यादा तंबाकू सेवन करने वाले राज्यों को रैंक किया जाए मिजोरम के बाद मेघालय में 72.2 प्रतिशत लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। मणिपुर में 70.6 प्रतिशत नागालैंड में 69.4 प्रतिशत तिरुपुरा में 67.8 प्रतिशत और असम में 63 दशमलव 9 प्रतिशत लोग तंबाकू का सेवन करते हैं।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 2014 के इस अध्ययन के मुताबिक 2011 में भारत में 35 से 69 आयु के वर्क के तंबाकू के उपयोग से संबंधित बीमारियों से निपटने की कुल लागत 1.05 लाख करोड़ रुपए (22.4 अब डॉलर) बताई सकल घरेलू उत्पाद का 1.0% और 2011 में स्वास्थ्य दाखिला पर संयुक्त राज्य और केंद्र सरकार के खर्च से 12% अधिक है।

भारत जैसे विकासशील देश में धूम्रपान का प्रचलन बढ़ रहा है । यह चिंता का विषय है अधिकांश युवा फैशन के रूप में इस शुरुआत करते हैं ,तो कुछ क्षणों के लिए अपनी दिमागी परेशानियों से राहत पाने के लिए। लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी लत बन जाती है । चिंता का विषय यह है कि देश में अब धूम्रपान करने वालों में महिलाओं और अल्प आयु के बच्चों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। वहीं पश्चिमी देशों में धूम्रपान की लत घट रही है। वहीं भारत में तमाम प्रयासों के बावजूद युवाओं में यह तेजी से बढ़ रही।  देश में धूम्रपान के बढ़ते प्रचलन का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि अमेरिका और चीन के बाद भारत तंबाकू उत्पादन के मामले में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है विश्व में धूम्रपान करने वालों की सबसे बड़ी तादाद चीन के बाद भारत में ही है।

विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार दुनिया भर में ध्रुमपान के कारण प्रतिदिन करीब 11000 व्यक्ति अर्थात प्रति वर्ष 4000000 लोग की मृत्यु हो जाती है। वही आंकड़े यह भी बताते हैं कि जिनमें से एक तिहाई लोगों की मौत केवल भारत में ही होती है। भारत में व्यस्कों की आधी आबादी ध्रुमपान करती है । जबकि ध्रुमपान करने वा में महिलाओं की संख्या 5 से 10% के बीच है। यही नहीं 15 वर्ष से अधिक आयु के 25 करोड़ से अधिक भारतीय तंबाकू सेवन के आदी है । वास्तव में ध्रुमपान एक ऐसा धीमा जा रहा है, जो हमारे शरीर में धीरे-धीरे प्राणघातक रोगों को जन्म देता है और व्यक्ति को धीमी गति से मृत्यु दे देती है। भारत में धूम्रपान का प्रचलन और इससे होने वाले खतरे जिस गति से बढ़ रहे हैं । वह चिंता का विषय है अधिकांश युवा फैशन के नाम पर मॉडल देखने की चाहत में धूंरपान की शुरुआत करते हैं और अंत इसके गुलाम बनकर रह जाते हैं वास्तविकता यही है कि खराब स्वास्थ्य पीले दांत बदबूदार सांसे खांसी जल्दी थकान आदि लक्षणों के अलावा उन्हें किससे और कुछ हासिल नहीं होता।

ऐसे तोहर तंबाकू उत्पाद पर भारत सरकार द्वारा चेतावनी लिखे जाने के लिए कानून निकाला गया है लेकिन इस को भी दरकिनार करते हुए आज की युवा पीढ़ी सिगरेट तंबाकू कस लेकर झूम रही है।

अधिक ग्रामीण भारतीय तंबाकू का उपयोग करते हैं।

पुरुष और महिलाओं दोनों 15 से 49 वर्ष की उम्र के बीच अपनी शहरों की तुलना में भारत के गोवा में अधिक तंबाकू का उपयोग करते हैं। शहरी महिलाओं में 4.4 गोवा में 8.1 प्रतिशत महिलाओं की तुलना में इसका इस्तेमाल करते हैं गांव में पुरुषों के लिए यह आंकड़ा 45% और शहर में 38.9 प्रतिशत है। तंबाकू के सेवन से बाहर निकलने की कोशिश करने वालों का प्रतिशत देखा जाए तो शहरी महिला उपयोगकर्ता 28.2 प्रतिशत प्रयास करती है लेकिन पुरुषों के लिए गया प्रवृत्ति उल्टी दी गई है गांव में 31.2 प्रतिशत पुरुष तंबाकू उपयोगकर्ता और शहर में 29.6 प्रतिशत ने तंबाकू से खुद को कम करने की कोशिश की है।

भारत को तंबाकू उत्पाद पर कर बढ़ाने की जरूरत क्यों है

ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे 2009 10 के मुताबिक धुआं रहित तंबाकू 25.9 प्रतिशत का उपयोग करने वालों की संख्या लगभग 2 गुनी है जो धूम्रपान का 14% है।

तंबाकू से भारत में लगभग 50% कैंसर और 90% मुंह के कैंसर के लिए जिम्मेदार हैं। मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में प्रोफेसर और सर्जन पंकज चतुर्वेदी ने कहा है मुंह के कैंसर के मरीजों का आधा हिस्सा निदान के 12 महीने के भीतर मर जाता है।

मिलियन डेट स्टडी के मुताबिक तंबाकू पुरुषों में सभी डांसरों का 42% और महिलाओं में 18% कैंसर का कारण बनता है कुल मिलाकर तंबाकू नए 120000 कैंसर रोग का कारण फेफड़ों के कैंसर के रूप में कई मौखिक कैंसर के साथ देखा जाता है या भारत में तंबाकू चबाने के कुछ प्रसार पर प्रकाश डाला गया है। तंबाकू उत्पाद पर कर बढ़ाना तंबाकू के उपयोग को कम करने के लिए एक अच्छा साक्षी आधारित उपकरण है अंतर्राष्ट्रीय तंबाकू दिवस की पूर्व संध्या पर जारी एक बयान में टीबी और फेफड़े रोग के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय संघ मिशेल रेस ने कहा हम भारत सरकार से भिड़ी और तंग रोग के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय संघ के विशेष विशाल ऋषभ ने कहा VDI सहित सभी तंबाकू उत्पाद पर उच्चतम सम्मान और सेवा कर लगाने के लिए अपील करते हैं।

तंबाकू के जाल में फंसता आज का युवा पीढ़ी

वास्तव में ध्रुमपान एक ऐसा धीमा जहर है। जो हमारे शरीर में धीरे-धीरे प्राणघातक रोगों को जन्म देता है और व्यक्ति को धीमी गति से मृत्यु शैया पर पहुंचा देता है भारत में ध्रुमपान का प्रचलन और इससे होने वाले खतरे जिस गति से बढ़ रहे हैं। वह चिंता का विषय है अधिकांश युवा फैशन के नाम पर मॉडर्न दिखने चाहत में धूम्रपान की शुरूआत करते हैं और अंतत के गुलाम बनकर रह जाते हैं ।वास्तविकता यह है कि खराब स्वास्थ्य, पीले दांत, बदबूदार सांसे, खांसी जल्दी, थकान आदि लक्षणों के अलावा उन्हें इससे और कुछ नहीं हासिल होता। तो सिगरेट के पैकेट पर लिखी वैधानिक चेतावनी मात्र असर दिखाई दे रहा है और नाशिक वाहनों में लिखे ध्रुमपान निश्चित के निर्देश का हमारे यहां सिगरेट के अलावा बीड़ी, तंबाकू ,गुटखा, खैनी तथा चिलम का उपयोग बहुत ज्यादा होता है। ध्रुमपान के संबंध में लोगों के दिमाग में कई तरह की गलत धारणाएं भी है। मसलन अधिकांश लोग इस तथ्य से तो भली-भांति परिचित होते हैं कि ध्रुमपान उनके स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके बाल बच्चों के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक साबित होता है और यह भी मानते हैं कि शरीर में चुस्ती फुर्ती लाने, मानसिक तनाव कम करने ,मूड बनाने, मन शांत करने, कब्ज दूर करने ,आनंद देने और व्यक्तित्व के निखार में सहायक होता है । आज दुनियाभर के विज्ञानिक चीख चीख कर कह रहे हैं कि ध्रुमपान से सैकड़ों किस्म की घातक बीमारियां जन्म लेती है। नशे के दुष्प्रभाव पर लिखी गई पुस्तक मौत को खुला निमंत्रण में बताया गया है धूम्रपान में निकोटीन की अधिकता के कारण सारे अनुकंपी तांत्रिक तंत्रिका उत्तेजित हो जाते हैं और हृदय गति तेज हो जाती है। जिससे रक्तचाप बढ़ जाता है इसके साथ हुआ मस्तिक और स्नायु तंत्र पर भी प्रभाव करता है।  जिससे मनुष्य की मनोस्थिति और व्यवहार पर असर पड़ने लगा है। ध्रुमपान में निकोटीन के अलावा कार्बन मोनोऑक्साइड भी जहर का काम करती  है और जब यह जहर खून में मौजूद हेमोग्लोबिन के साथ मिलकर का कार्बोक्सि हिमोग्लोबिन मैं बदल जाता है जिससे ऑक्सीजन का दबाव कम हो जाता है और रक्त पहुंचाने वाली धमनियों के लगातार तेज होने से सीने में दर्द होने लगता है सिगरेट के धुएं में लगभग 4000 विषैले रासायनिक तत्व मौजूद होते हैं जो शरीर पर तरह तरह से अपना दुष्प्रभाव डालते हैं ध्रुमपान से हृदय रोग लकवा हर तरह का कैंसर मोतियाबिंद नपुसंकता बांझपन पेट का अल्सर एसिडिटी दामा मिलगी मेनिया जैसे घातक रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है ध्रुमपान से मोतियाबिंद का खतरा बन जाता है और आंखों की रेटिना प्रभावित होने लगती है। जिससे आंखों में कमजोरी, कम दिखना आदि जैसे प्रभाव भी देखने को मिलते हैं।

आधुनिक समय में नपुंसकता के प्रकोप में वृद्धि के लिए ध्रुमपान एक मुख्य कारण  ध्रुमपान से होठ मुख गला भोजन नली पाचन ग्रंथि फेफड़ा श्वास नली मूत्राशय गुर्दा मूत्र संबंधी अंगों का कैंसर हो सकता है इसके अलावा रक्तचाप स्थानीय रक्त अल्पता संबंधी ह्रदय रोग मस्तिक वाहिनी रोग तपेदिक निमोनिया इंफ्लुएंजा दामा वायु नली की रुकावट आदि रोग भी हो सकते हैं ध्रुमपान से ना केवल फेफड़ों का कैंसर होता है बल्कि पायरिया वारदातों के अन्य लोग भी होते हैं। इससे इंद्रियों में शीतलता आने के कारण श्रवण शक्ति पर दुष्प्रभाव पड़ने की वजह से व्यक्ति बहरेपन का शिकार भी हो सकता है। आमाशय में अम्ल की मात्रा को बढ़ाता है । जो भावसार और अल्सर का कारण बनता है । तंबाकू से निकलने वाले रसायन हमारे रक्त प्रवाह के साथ गुर्दे तक पहुंच जाते हैं और मूत्र द्वारा शरीर से बाहर निकल आते हैं जिससे यूरिनरी ब्लैडर यानी संग्रहण थैली में कैंसर की संभावना बढ़ जाती है ध्रुमपान से हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आती है। स्वसन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है पेट में जख्म बनते हैं। नेत्रज्योति और नियंत्रण हो जाती है निद्रा और एकाग्रता में कमी आती है मन अशांत रहता है और गुर्दा खराब हो जाते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का दावा है कि दिन में लगातार दो पैकेट सिगरेट पीने वाले व्यक्ति की उम्र करीब 8 वर्ष कम हो जाती है । जबकि कम सिगरेट पीने वाले व्यक्ति भी अपनी उम्र के 4 वर्ष घटा लेते हैं। बीड़ी सिगरेट पीने वालों में दिल का दौरा पड़ने की संभावना ध्रुमपान ना करने वालों की अपेक्षा 3 से 4 गुना अधिक होता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि उबले तंबाकू के पानी की एक बूंद एक बिल्ली के लिए और दो बूंद कुत्ते के लिए 5 मिनट में ही घातक सिद्ध हो सकती है स्थलों के अलावा बंद कमरे में धूम्रपान करने वालों के लिए खतरनाक सिद्ध होता है चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि जिन बच्चों के माता-पिता बीड़ी सिगरेट आदि होते हैं बच्चों में कई तरह की बीमारियां होने का खतरा रहता है ब्रोंकाइटिस आदि।

भारत सरकार द्वारा तंबाकू धूम्रपान निषेध कानून

भारत सरकार द्वारा 27 फरवरी 2005 को तंबाकू नियंत्रण पर डब्ल्यूएचओ फ्रेमवर्क कन्वेंशन के अंतर्गत तंबाकू ूम्रपान निषेध कानून लाया गया.

  • धूम्रपान मुक्त स्थान:- कल सौजन्य का स्थान और स्वास्थ्य केंद्रों शिक्षा और सरकारी सुविधाओं और सजनी परिवहन जैसे कार्य स्लोगन धूम्रपान पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया हालांकि ध्रुमपान क्षेत्र हवाई अड्डे का स्थान 30 या अधिक कमरे वाले होटल और 30 या उससे अधिक के लिए बैठने की क्षमता वाले रेस्टोरेंट स्थापना की अनुमति देते हैं स्थानों के संबंध में सभागार स्टेडियम रेलवे स्टेशन बस स्टॉप आदि जगहों पर ध्रुमपान करना गैरकानूनी कर दिया गया है।
  • तंबाकू विज्ञापनों पर रोक लगाई गई है मास मीडिया के अधिकांश रूपों के माध्यम से विज्ञापन प्रतिबंधित है। तंबाकू पैकेजिंग और लेबलिंग पर विश्वास चेतावनी लेबल चित्र में और उसके बारे में हानिकारक प्रभाव लिखे होने चाहिए।
  • इसके अलावा भी तंबाकू नियंत्रण कानून बनाए गए हैं जैसे विज्ञापन संबंधी और उनके व्यापार आदि पर।

आपने हमारे इस विशेष लेख पर तंबाकू से जुड़े हानिकारक प्रभाव के बारे में पढ़ा । धूम्रपान के दुष्प्रभाव को देखने और समझने के बाद अब फैसला आपके हाथ में है कि आप अपने साथ अपने परिवार की जिंदगी भी इस धुँए में उड़ाना पसंद करेंगे या तंबाकू ध्रुमपान से तौबा कर के अपने व अपने परिवार के लिए स्वास्थ्य चुनना पसंद करेंगे।

 

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