धर्म के नाम पर आत्महत्याएं, दिल्ली बुराड़ी आत्महत्या, इससे पहले भी धर्म के नाम पर कई लोगों ने दी है अपनी जान

रहस्यमय तथ्य

दिल्ली के बुराड़ी में 11 लोगों ने एक साथ आत्महत्या कर के मोक्ष पाने के लिए ऐसा किया, लेकिन यह घटना पहली घटना नहीं है जब एक साथ कई लोगों ने धर्म के नाम पर आत्महत्या की है।

दिल्ली के बुराड़ी में रहने वाले भाटिया परिवार की कथित तौर पर मोच प्राप्ति के नाम पर सामूहिक आत्महत्या ने चारों तरफ सनसनी फैला दी है। लेकिन यह इतिहास में पहली घटना नहीं है, इतिहास में ऐसे कई दिल दहला देने वाले मामले घटित हुआ है जो आज भी राज बने हुए हैं।

आत्महत्या एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ होता है डर जानबूझकर अपनी मृत्यु का कारण बनना। आत्महत्या अक्सर निराशा के चलते की जाती है जिसके लिए अवसाद, मनो भाजन, शराब की लत या मादक दवाओं का सेवन च से मानसिक विकारों को जिम्मेवार माना जाता रहा है। लेकिन दिल्ली में हुए एक साथ 11 लोगों की आत्महत्या इन सब कारणों से नहीं बल्कि किन्ही धार्मिक अंधविश्वासों के कारण हुई है। हद से ज्यादा धार्मिक अंधविश्वासों पर विश्वास करना मनुष्य को अपने हदों से पार आत्महत्या के लिए उकसाता आता है। इन धार्मिक अंधविश्वासों में मोक्ष की प्राप्ति करने हेतु भी लोग अपने आप को मार बैठते हैं।

लेकिन यह घटना पहली घटना नहीं है जिसमें एक साथ कई लोगों ने मोक्ष प्राप्ति के लिए अपने आप को मार डाला है। आज हम लोग अपने इस आर्टिकल में दुनिया भर में घटित ऐसे ही कई लोगों द्वारा की गई आत्महत्या की घटना का जिक्र इस लेख में करने वाले हैं।

पीपुल्स टेंपल में एक साथ 918 लोगों ने की थी आत्महत्या

18 नवंबर 1978 को पीपुल्स टेंपल में एक साथ 918 अमेरिकी नागरिकों ने आत्महत्या कर ली थी। पीपुल्स टेंपल के पुजारी जिम जोंस के नेतृत्व में 909 सदस्यों सहित अन्य 9 व्यक्ति ने आत्महत्या की थी। जिनमें से 276 बच्चे शामिल थे। पीपुल्स टेंपल के जोनस टाउन मंडप मैं मिले एक टेप में बार-बार क्रांतिकारी आत्महत्या करने की चर्चा शामिल है। उस टेप पर यह बातचीत करते हुए मंदिर के सदस्यों को सुना गया कि रूस जो यह चाह रहा था कि मंदिर का विस्थापन और वहां पर रहने वाले लोगों को वहां से दूर कर दिया जाए, इस कारण मंदिर के सदस्यों द्वारा एक प्रकार के खतरनाक रसायन द्वारा अपनी आत्महत्या करने की बात रिकॉर्ड हुई थी।

18 नवंबर 1978 को जोनस टाउन के लोगों ने और मंदिर के सदस्यों ने साइनाइड खाकर अपनी जान ले ली थी।

सौर मंदिर आत्महत्या

सन 1994 से लेकर सन 1997 तक सौर मंदिर के सदस्यों द्वारा आत्महत्या किया गया। यह एक लगातार संक्राति जिसमें 74 लोगों की मौत हो गई। आर्डर ऑफ द शोर मंदिर के सदस्यों ने मरते वक्त एक पत्र लिखा था जिसमें कहा गया था कि उनका मानना है कि उनकी मृत्यु इस दुनिया के पाखंड और उत्पीड़न से बच जाएगी इसमें जोड़ा गया कि उन्होंने महसूस किया है कि वह सीरियस पर आगे बढ़ रहे हैं। क्यूबेक पुलिस द्वारा जप्त की गई रिपोर्ट से पता चला है कि कुछ सदस्य ने उनके नेता जोसफ डी मंब्र को व्यक्तिगत रूप से 1 मिलियन डॉलर की दान प्राप्त हुई थी।

इस मंदिर के सदस्यों ने एक बार फिर सन् 1990 के दशक में सामूहिक आत्महत्या करने की कोशिश की गई थी लेकिन पुलिस द्वारा उसे विफल कर दिया गया था।

हैवन गेट मैं एक साथ 38 लोगों ने आत्महत्या की थी

हेवन गेट की आत्महत्या के बारे में ऐसा कहा जाता है कि यहां के एक पागल और विक्षिप्त धर्मगुरु “एप्पलवाइट” ने एक पथ बनाया जिसका नाम उसने हेवन गेट रखा। उसने अपने अनुयायियों को कुछ इस तरह सम्मोहित किया कि 38 लोगों ने अपने गुरु एप्पल वाइट के साथ स्वर्ग जाने के नाम पर आत्महत्या कर ली थी।

हैवन गेट के धर्मगुरु मार्शल हर्फ़ एप्पल वाइट का जन्म सन 1931 में अमेरिका में हुआ था। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अमेरिकन आर्मी ज्वाइन की लेकिन उनका यहां मन नहीं लगा। इसलिए उन्होंने सेना छोड़ दी और यूनिवर्सिटी ऑफ अलबामा में एक संगीत के अध्यापक बन गया। लेकिन यहां पर उन्होंने अपने एक छात्र के साथ शारीरिक संबंध बनाया जिसके चलते उन्हें अपनी नौकरी गंवानी पड़ी थी। इसके बाद उनकी मुलाकात एक बोनी ने टेल्स नाम की नर्स से हुई । दोनों का झुकाव रहस्यवाद जैसे विषयों पर था इसलिए दोनों ने खुद को देवदूत बनाने का निर्णय कर लिया। दोनों ने मिलकर पहले एक बुक स्टोर और शिक्षण संस्थान खोला लेकिन उनका यह प्रयास पूरी तरह असफल रहा।

दोनों 1973 में पूरी अमेरिका की यात्रा पर निकले और अपने एक नए धर्म को प्रसारित करने का ठान ना। 2 साल तक असफल रहने के बाद उनके अब अनुनाई बनने लगे।

23 मार्च 1997 के दिन Apple वाइफ ने अपने चुने हुए अनुयायियों को सैन डिएगो कैलिफ़ोर्निया स्थित अपने आश्रम में बुलाया और सभी 38 लोगों ने एक साथ सुसाइड कर लिया। बाद में सूचना मिलने पर पुलिस जब वहां पहुंची तो पुलिस ने आश्रम से 38 से बरामद किए। सभी लोगों ने एक जैसे कपड़े पहने हुए थे। सभी साव बिस्तर के ऊपर थे और सभी शव बैंगनी रंग का कपड़ा ढका हुआ था। सन 1980 के दशक में इस घटना के ऊपर हॉलीवुड फिल्म Heaven’s Gate भी बन चुकी है। सबसे मजे की बात यह है कि आज तक भी उसके अनुनाई यह विश्वास करते हैं कि एलियन इस धरती पर आएंगे और इसे नष्ट कर देंगे। इसलिए आज तक इस पथ पर आप उनके अनुयायियों को साल में एक बार उपासना करते हुए देख सकते हैं।

एडम हाउस में हुई आत्महत्या है

2007 में माइमैसिंग, बांग्लादेश में नव वर्ष का एक परिवार एक उपन्यास एडम पंथ के सभी सदस्यों ने खुद को ट्रेन में फेंक कर बड़े पैमाने पर आत्महत्या की थी।

डेली मेल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के लिए पीड़ित किया गया था। पीड़ितों के घर से प्राप्त डायरी एडम हाउस से संबंधित हुए आदम और हव्वा के साथ रहने वाले शुद्ध जीवन चाहते थे। खुद को किसी भी धर्म के साथ बांधने और बाहरी व्यक्ति के संपर्क से वह दूर रहना चाहते थे। उन्होंने इस्लाम धर्म छोड़ने के बाद ना ही किसी इसाई धर्म सम्हारो में हिस्सा लिया था। लेकिन कभी कबार वह काली की पूजा क्या करते थे।

दोस्तों यह थी कुछ ऐसी घटनाएं जिनमें लोगों ने धर्म के अंधविश्वास के कारण आत्महत्या कर ली थी। आपको हमारा यह आर्टिकल कैसा लगा हमें अपने सुझाव आप हमें कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं।

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