नासा का एक और ऐतिहासिक कदम: सूरज के चक्कर काटेगा NASA का पार्कर सोलर प्रोब यान

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नासा अपने अंतरिक्ष प्रोग्राम मैं एक और चरण ऊपर उठ गया है। सूर्य से संबंधित बहुत से जानकारियों से हम अभी भी अज्ञान है। सूरज और उससे संबंधित जानकारियों को जुटाने के लिए नासा ने अपना पार्कर सोलर प्रोब जान अंतरिक्ष में छोड़ दिया है।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने “TOUCH THE SUN” मिशन के तहत रविवार को पार्कर सोलर प्रोब यान प्रोग्राम को लॉन्च कर दिया। दुनिया का यह पहला अंतरिक्ष यान है जो सूर्य के सबसे अधिक से निकट से गुजरेगा। साथ ही दुनिया का पहला मिशन भी है, जिसमें पहली बार किसी अंतरिक्ष यान को सूर्य की प्रक्रिमा करने के लिए सूर्य के इतने नजदीक से बहुत सारी जानकारियां और डाटा एकत्रित करेगा।

शनिवार को हीलियम अलार्म बजने की वजह से यह यान 24 घंटे के देरी से रवाना हुआ। इस यान को डेल्टा -4 रॉकेट से कैप्कैंरिवाल एयरफोर्स स्टेशन से भेजा गया। यह यान 85 दिनों बाद सूर्य के पास यानी 5 नवंबर को सूर्य की कक्षा में पहुंचेगा। सूर्य के बाहरी वातावरण कोरोना के रहस्य पर से पर्दा उठाने और अंतरिक्ष के मौसम पर पड़ने वाले उसके प्रभाव को जानने के लिए यह मिशन 7 साल का सफर करेगा। यह यह सूर्य के कोरोना का 24 चक्कर लगाएगा। कार के आकार वाला या यान सीधे सूरज के वातावरण के भीतर से गुजरेगा जो उसकी सत्ता से करीब 6500000 किलोमीटर दूर है। इससे पहले भेजे गए अंतरिक्ष यानों से 7 गुना से ज्यादा सूर्य के करीब जाएगा। यहां से 700000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सूरज के पास पहुंचेगा। इस में लगे थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम के कारण ऐसा संभव हो पाएगा। कोरोना से गुजरने के दौरान यह यान इस तरह के सबसे नजदीक से अवलोकन करेगा। इन दिनों से मिली जानकारी और डाटा हमारे तारे के बारे में तीन मौलिक सवालों के जवाब ढूंढने में वैज्ञानिकों की काफी मदद कर सकता है। हमारी धरती और सूरज के बीच की औसत दूरी लगभग 9 करोड़ 30 लाख मील है।

अब तक भेजे गए अंतरिक्ष यान जो सूर्य के नजदीक से गुजरे

यह दुनिया के इतिहास में पहला मौका नहीं है जब किसी अंतरिक्ष यान को सूर्य के कक्षा के जानकारी और उसके वातावरण से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करने के लिए अंतरिक्ष में छोड़ा गया है। इससे पहले भी कई अंतरिक्ष यानों को सूर्य की कक्षा में भेजा गया है।

हेलियोस 2

हेलियोस दो यान दुनिया का पहला अंतरिक्ष यान था जो सूरज के सबसे ज्यादा निकट से गुजरा है। 1976 में हेलियोस सूर्य से 4.3 करोड़ किलोमीटर दूरी से गुजरा जो अब तक रिकॉर्ड किए गए। डाटा के मुताबिक सूर्य के सबसे अधिक निकट से गुजरा है। लेकिन नासा द्वारा भेजा गया यह यान उतना कामयाब सिद्ध नहीं हुआ।

पार्कर सोलर प्रोब

नासा के मिशन का उद्देश्य कोरोना कि पृथ्वी की सतह पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना है। स्पेसक्राफ्ट के जरिए कोरोना की तस्वीर ली जाएगी और सत्ता का मापन किया जाएगा। नासा के इस मिशन के लिए सबसे बड़ी चुनौती सूर्य का तापमान है। अत्यधिक ताप के कारण ही आज तक कोई भी स्पेसक्राफ्ट सूर्य के करीब नहीं जा सका है। नासा ने ऐसा थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम तैयार करने में सफलता हासिल कर ली है जिससे स्पेसक्राफ्ट को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।

क्या है पार्कर सोलर प्रोब?

नासा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पार्कर सोलर प्रोब एक रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट है। इस अंतरिक्ष यान को 6 अगस्त को फ्लोरिडा प्रांत केप कैनावैराल से छोड़ा गया। यह माना जा रहा है कि यह अंतरिक्ष यान दूसरे यानों की तुलना में सूर्य के 7 गुना ज्यादा करीब जाएगा। जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के प्रोजेक्ट विज्ञानिक निकोलस फॉक्स ने शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा था,” सोलर प्रोब अंतरिक्ष यान को इस प्रकार से डिजाइन किया गया है कि यह कठोर परिस्थितियों में भेजने की कुछ महत्वाकांक्षा है”।

इससे पहले आपको बता दें कि जर्मनी की अंतरिक्ष एजेंसी और नासा ने मिलकर 1976 में एक अंतरिक्ष यान हेलियोस दो नाम का प्रोग्राम सूर्य के सबसे करीब भेजा था। जो सूरज से 4.30 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर था। धरती से सूरज की औसत दूरी लगभग 15 करोड़ किलोमीटर है। नासा को अपने इस अंतरिक्ष प्रोग्राम से काफी उम्मीद है कि इस प्रयोग से विज्ञानिक धरती के वातावरण में होने वाले बदलाव की भविष्यवाणी करने में सक्षम हो सकेंगे।

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