पीएम मोदी को सवाल कब मिलेंगे 1500000 रुपए?

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सूचना के अधिकार कानून के तहत मोहन कुमार शर्मा ने  PM मोदी कार्यालय से पूछा कब मिलेंगे 1500000 रुपए?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव के दौरान नागरिकों के बैंक खाते में 1500000 रुपए डालने का वादा किया था. लेकिन अभी तक किसी भी नागरिक के खाते में 1500000 रुपए जमा नहीं किए गए.  आपको नोटबंदी का दिन तो याद ही होगा जिसमें काला धन को वापस लाने की बात कही गई थी. अब बात तो यह रहा कि नोटबंदी से कालाधन वापस तो आया नहीं और ना ही नागरिकों के खाते में 1500000 आए.

आरटीआई कर पूछा कब आएंगे 1500000 रुपए

सूचना के अधिकार कानून आरटीआई के तहत मोहन  कुमार शर्मा ने 26 नवंबर 2016 को आवेदन देकर यह जानकारी मांगी थी यह आवेदन ₹1000 और ₹500 के नोटों के बंद होने की घोषणा के करीब 18 दिन बाद दिया गया था. इस आरटीआई के तहत यह जानकारी मांगी गई थी कि कब खाते में 1500000 रुपए आएंगे इसके अलावा तारीख के बारे में भी जानकारी मांगी गई थी कि मोदी जी के वादे के अनुसार कब प्रत्येक नागरिक के खाते में 1500000 रुपए डाले जाएंगे. सुनवाई के दौरान शर्मा ने मुख्य सूचना आयुक्त आर के माथुर के सामने शिकायत की कि और रिजर्व बैंक ने उन्हें पूरी सूचना उपलब्ध नहीं कराई है माथुर ने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार आवेदनकर्ता ने अन्य बातों के अलावा यह जानकारी मांगी थी कि प्रधानमंत्री के वादे के अनुसार नागरिक के खाते में कब 1500000 रुपए डाले जाएंगे यह जानकारी आरटीआई कानून की धारा 2 (F) के तहत सूचना के दायरे में नहीं आती.

आरटीआई कानून के इस धारा के अनुसार सूचना से जुड़े रिकॉर्ड दस्तावेज क्या पवन इमेल प्रेस विज्ञप्ति सलाह अनुबंध रिपोर्ट दस्तावेज नमुना लॉग बुक समिति किसी भी रुप में रखी सामग्री से है साथ ही सूचना किसी भी निजी निकाय से संबंध हो सकती है जिस तक किसी भी कानून के तहत सार्वजनिक प्राधिकार की पहुंच हो सकती है.

आरटीआई अधिनियम क्या है और आप कैसे इस अधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं?

आरटीआई अधिनियम कानून मुख्य रूप से भ्रष्टाचार के खिलाफ 2005 में एक अधिनियम लागू किया गया जिसे सूचना का अधिकार यानी आरटीआई कहा गया.  इस सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत कोई भी नागरिक किसी भी सरकारी विभाग से कोई भी जानकारी ले सकता है बस शर्त यह है कि आरटीआई के तहत पूछे जाने वाली जानकारी तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए यानी हम किसी सरकारी विभाग से उसके विचार नहीं पूछ सकते जैसे आपके इलाके में विकास के कामों के लिए कितने पैसे खर्च हुए हैं और कहां खर्च हुए हैं आपके इलाके की दुकान में कब और कितना राशन आया स्कूल कॉलेज और हॉस्पिटल में कितने पैसे खर्च हुए हैं ऐसे ही सवाल आप राइट टू इनफार्मेशन एक्ट के तहत पता कर सकते हैं.

अब आप यह तो समझ ही गए होंगे सूचना का अधिकार का मतलब क्या होता है. लोगों के पास सूचना के अधिकार को लेकर कई सवाल है लेकिन हम सरल तरीके से इसका जवाब देने की कोशिश करेंगे.

आरटीआई के क्या-क्या फायदे हैं?

  • कोई भी नागरिक किसी भी सरकारी विभाग से यह जानकारी प्राप्त कर सकता है
  • यह अधिकार एक आम नागरिक के पास है जो सरकार के काम या प्रशासन में और पारदर्शिता लाने का काम करता है
  • यह अधिनियम भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा कदम है

आरटीआई के तहत कैसे आप जानकारी मांग सकते हैं?

  • इस अधिकार के अंतर्गत आप हम किसी भी सरकारी विभाग की राय जानने के लिए नहीं कर सकते . इसका उपयोग हम तथ्यों की जानकारी पाने के लिए कर सकते हैं . जैसे किसी दवाई की दुकान में कितने दवाइयां आती है, और साफ सफाई में कितना खर्च हुआ, किसी सरकारी दफ्तर में कितनी नियुक्तियां हुई है ,इसके अलावा सड़क बनाने के लिए कितने पैसे आए और कहां-कहां खर्च किए गए.
  • हर सरकारी दफ्तर, प्रधानमंत्री ,मुख्यमंत्री,बिजली कंपनियां, Bank, स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल ,राष्ट्रपति, पुलिस बिजली कंपनियां ,आरटीआई एक्ट के अंदर आती है.
  • सरकार के सुरक्षा से संबंधित जानकारी या गोपनीय जानकारी इस अधिकार के अंतर्गत नहीं आती है
  • हर सरकारी विभाग में जन सूचना अधिकार होता है आप अपने आवेदन पत्र उसके पास जमा करवा सकते हैं
  • आवेदन पत्र का फॉर्मेट आप इंटरनेट से डाउनलोड कर सकते हैं या फिर एक सफेद कागज पर अपना आवेदन लिख सकते हैं जिससे जन सूचना अधिकार आपकी मदद करेगा. आरटीआई के एप्लीकेशन आप किसी भी भारतीय भाषा में लिख सकते हैं हिंदी, इंग्लिश या कोई भी स्थानीय भाषा.
  • आप अपने आवेदन पत्र की फोटो कॉपी करवा कर सूचना अधिकारी से रिसीविंग जरूर ले लें.

आरटीआई के तहत कब तक आपको मिलेगी जानकारी?

  • आवेदन पत्र डालने के 30 दिन के अंदर आपको जवाब मिल जाएगा
  • अगर आपको 30 दिन के भीतर जो आप नहीं मिल पाता है तो आप कोर्ट में अपील कर सकते हैं.
  • किसी भी सरकारी विभाग से जानकारी प्राप्त करने के लिए आवेदन पत्र के साथ ₹10 की फीस लगती है यह फीस गरीबी रेखा से नीचे के लोगों के लिए माफ है.

भारत में सिर्फ जम्मू कश्मीर एक ऐसा राज्य है जहां आप आरटीआई का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं.