बॉलीवुड की हसीन अदाकारा सोनाली बेंद्रे को हुआ कैंसर

मिर्च मसाला

बॉलीवुड की जानी-मानी अदाकारा सोनाली बेंद्रे कि कैंसर की खबर सोशल मीडिया पर जैसे ही आई, सारा का सारा सोशल मीडिया उनके लिए दुआ करने लगा

बॉलीवुड की एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे को कैंसर की खबर सोशल मीडिया पर जोरों से चल रही है। और उनके फैंस हर एक सोशल मीडिया पर उनके लिए दुआ कर रहे हैं। सोनाली बेंद्रे फिलहाल न्यूयॉर्क में है ,और अपना कैंसर का उपचार करवा रही है। सोनाली बेंद्रे ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर मेटास्टेटिक कैंसर होने का जिक्र किया है। इससे उनके फैंस को काफी दुख हुआ है। आइए जानते हैं फिलहाल कितना खतरनाक होता है मेटास्टेटिक कैंसर।

इससे पहले कुछ समय पहले एक्टर इरफान खान ने सोशल मीडिया में खुद को कैंसर होने की बात कह कर सभी फ्रेंड्स को चौंका दिया था। अब ऐसे में बॉलीवुड की और एक खूबसूरत अदाकारा ने खुद को कैंसर होने की बात का खुलासा किया है। एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे ने सोशल मीडिया के जरिए पेरेंट्स को कैंसर होने की बात का खुलासा किया है। सोनाली ने बताया कि उन्हें हाई ग्रेड कैंसर हुआ है और इस के इलाज के लिए वह इन दोनों न्यूयॉर्क में है। बुधवार को सोनाली बेंद्रे ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट लिखकर साफ किया था कि कैसे वह इस बीमारी से जूझ रही है और इस दौरान उनके दोस्त और परिजन उनका पूरा साथ दे रहा है। उन्होंने कहा है कि उन्हें हाई ग्रेड कैंसर या मेटास्टेसिस कैंसर हुआ है।

क्या होता है मेटास्टेसिस कैंसर

मेटास्टेसिस कैंसर में इसके सेल्स तेजी से शरीर में फैलते हैं। जो कि लो ग्रेड कैंसर सेल से कई गुना तेजी से बढ़ते हैं। जब शरीर में सफेद और लाल रक्त कोशिकाएं का संतुलन बिगड़ने और सेल के बनाने पर नियंत्रण हो जाता है, तब कैंसर होता है। इस परिस्थिति को मेटास्टेटिक कैंसर भी कहते हैं। यह स्टेज 4 कैंसर होता है। जिन व्यक्तियों को गुर्दा का अल्लाह स्टेज कैंसर होता है उनके पास भी 4 से 5 साल की जीवित रहने के लिए होते हैं। माइटोसिस कैंसर को प्राइमरी कैंसर भी कहा जा सकता है। उदाहरण के तौर पर देखा जाए कि अगर ब्रेस्ट कैंसर गुर्दे में फैल गया तो, तो उसे मेटास्टिक ब्रेस्ट कैंसर कहा जाता है। इस कैंसर में मरीज को तुरंत इलाज देना जरूरी होता है।

सबसे पहले कहां फैलता है मेटास्टेसिस कैंसर

ट्यूमर के टूटने फूटने के बाद खून के जरिए अज्ञान से पूरे शरीर में फैल कर सबसे पहले हड्डियों को अपना शिकार बनाता है, इसके बाद यह कैंसर फेफड़ों, लीवर और दिमाग तक पहुंच जाता है। इसके बाद या कैंसर गर्भाशय, मूत्राशय ,बड़ी आंत और रीढ़ की हड्डियों की तरफ रुख करता है।

हमारी खराब लाइफस्टाइल और खानपान के कारण लोग बहुत बड़ी तादाद में इसके आंसर की चपेट में आ रहे हैं। अगर कैंसर के शुरुआती लक्षण समय रहते दिख जाए, तो इसे बचा जा सकता है। लेकिन इस कैंसर में कोई शुरुआती लक्षण देख पाना मुश्किल होता है। जब भरता है ट्यूमर के रूप में तो इनकी प्रकृति फ्रीक्वेंसी मेटास्टेटिक ट्यूमर के साइज और उसकी जगह पर निर्भर करती है। फिर भी इन के लक्षण जान लेना आवश्यक है

  • पेशाब और शौच के समय खून आना
  • खून की कमी से एनीमिया होना
  • खांसी के दौरान खून आना
  • हड्डियों में दर्द
  • मल-मूत्र पर नियंत्रण नहीं रहना
  • गले के आसपास किसी प्रकार की गांठ होना
  • शरीर में नीला दाग पड़ना, अचानक से खून में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाना।

डॉक्टरों के लिए बड़ी है मुश्किल है। किस हद तक और कैसे इलाज संभव है

एक वक्त के बाद मेटास्टेटिक कैंसर के सेल्स की बढ़ोतरी रोकना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि यह पूरे शरीर में फैल जाता है। लेकिन अगर समय रहते कैंसर का पता लग जाए तो इसका इलाज कुछ हद तक संभव है।

डॉक्टर्स की मानें तो यह कैंसर पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलते हैं। इसे रोकने और इसका इलाज के लिए यह देखना जरूरी है कि यह कैंसर कहां से प्रारंभ हुआ है। उस हिसाब से इसका इलाज तो हो सकता है। दवाइयां ,इंजेक्शन के अलावा कीमोथैरेपी, रेडिएशन थेरेपी के जरिए इस पर काबू करने की कोशिश की जा सकती है।

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