भारत की पहली रॉके जिसे साइकिल पर ले जाया गया

भारत का पहला रॉकेट जिसे साइकिल से ले जाया गया और एक चर्च से लॉन्च किया गया

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आपको यह सुनकर थोड़ा बहुत तो आश्चर्य जरूर हो रहा होगा कि भारत की पहली रॉकेट ट्रांसपोर्टेशन एक साइकिल से हुआ  और उसे एक चर्च से लॉन्च किया गया था।

 

डॉ विक्रम साराभाई ने 15 अगस्त 1969 को इसरो की स्थापना की थी । आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारे विज्ञानिक आसमान मिट्टी करने के सफर पर साइकल और बैलगाड़ी के जरिए निकले थे। विज्ञानिकों ने पहले रॉकेट को साइकिल पर लादकर उसे प्रक्षेपण स्थल पर ले गए थे। इस मिशन का दूसरा रॉकेट काफी बड़ा और भारी था जिसे एक बैलगाड़ी के सहारे प्रक्षेपण स्थल पर ले जाया गया था। इससे भी ज्यादा रोमांचकारी और दिलचस्प बात यह है, कि भारत ने पहले रॉकेट के लिए नारियल के पेड़ों को लॉन्चिंग पैड बनाया था हमारे भारतीय वैज्ञानिकों के पास अपना दफ्तर या कार्यालय नहीं था वह कैथोलिक चर्च सेंट मैरी मुख्य कार्यालय में बैठकर सॉरी प्लानिंग करते थे अब पूरे भारत में इसरो के 13 सेंटर है।

First rocket india transported on cycle

इसरो ने अपना पहला उपग्रह 19 अप्रैल 1975 को लांच किया उस समय भारत के प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी थी इसरो के भारत देश में कुल 21 शहरों में स्पेस सेंटर हो चुके हैं इसकी स्थापना विक्रम साराभाई नए द्वारा की गई थी इसलिए विक्रम साराभाई को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक भी माना जाता है।

साल 1979 तक इसरो ने अपने खुद के पूर्ण स्वदेशी सेटेलाइट बनाने में तो कामयाबी हासिल कर चुका था ,पर उसे अभी भी अंतरिक्ष में सैटेलाइट लॉन्च करने के लिए दूसरे देशों की सहायता लेनी पड़ती थी। लेकिन 1980 में अपना खुद का सेटेलाइट बनाकर उसे स्पेस मैं भी सफलता के साथ लॉन्च कर दिया।इस तरह से isro ने पूर्ण स्वदेशी सैटेलाइट लॉन्च किया जिसका निर्माण और प्रक्षेपण पूरी तरह से भारत में किया गया था . आप यह जानकर गौरव होगा कि अमेरिका, जापान रूस, चीन, फ्रांस के साथ भारत विश्व के उन देशों में शामिल है, जो अपने देश में सेटेलाइट बनाने के साथ उसे अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता रखता है।

इसरो द्वारा भारत के अब तक 100 से भी ज्यादा सैटेलाइट लांच किया जा चुका है कई देशों के लिए भी सेटेलाइट भारत लांच कर चुका है भारत की शक्ति का प्रदर्शन पूरे विश्व में कर चुका है जो कि हर भारतीय के लिए गर्व की बात है।

अब तक के सफर में ISRO ने कई उपलब्धियां हासिल की है लेकिन इनमें से कुछ जो हमें दुनिया के नक्शे पर खास बनाते हैं यह उपलब्धियां पर एक नजर डालते हैं।

  • आर्यभट्ट इसरो का पहला उपग्रह था जो कि 19 अप्रैल 1975 को लांच किया गया था जिसने सिर्फ 5 दिन बाद काम करना बंद कर दिया था इसे बनाने के लिए रूस की सहायता ली गई थी।
  • सन 22 अप्रैल 2008 को इसरो ने चंद्रयान-1 लांच किया था जिसका बजट 350 करोड़ रुपए था।
  • हमने रूस की बराबरी की हमारे विज्ञानिकों ने 1990 में ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी तैयार किया पहली बार पीएसएलवी के जरिए 1993 में पहला उपग्रह ऑर्बिट में भेजा गया इससे पहले केवल रूसी ऐसा कर पाया था।
  • इसरो के वैज्ञानिकों ने 2008 में पृथ्वी और चांद की दूरी को खत्म करते हुए चंद्रयान को अंतरिक्ष में भेजा हमारे विज्ञानिक कौन है दुनिया में सबसे सस्ता चंद्रमा मशीन पूरा किया हमसे पहले केवल 6 देश ऐसा कर पाए थे लेकिन उन्होंने इस पर काफी पैसे खर्च किए थे आपको यह जानकर हैरानी होगी कि अमेरिका का NASA जितने पैसे 1 साल में खर्च करता है इसरो में 40 साल तक काम करता है।
  • पहले प्रयास में ही हम मंगल ग्रह का सफर पूरा किया। इसरो के वैज्ञानिकों ने दुनिया में पहली बार पहले प्रयास में मंगल ग्रह के सफर को पूरा कर लिया अमेरिका रूस और यूरोपीय स्पेस एजेंसी को कई प्रयास के बाद मंगल ग्रह पहुंचने पर सफलता मिली थी।
  • एक रॉकेट से प्रक्षेपित के 104 सैटेलाइट इसरो ने अपने सबसे सफल रॉकेट पीएसएलवी की मदद से 104 सैटेलाइट को प्रक्षेपित किया इसमें 101 विदेशी सेटेलाइट है इन्हें भारत और अमेरिका के अलावा इजराइल और न्यूजीलैंड और कजाकिस्तान के छोटे आकार के सेटेलाइट शामिल है ऐसा करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन गया किरण कुमार ने बताया है कि एक उपग्रह का वचन 730 किलो का है जबकि बाकी के दो कवच 1919 किलो है इनके अलावा हमारे पास 600 किलो और वजन भेजने की क्षमता थी इसलिए हमने 101 दूसरे सेट लाइटों को भी लॉन्च करने का निर्णय लिया।

इसरो ने अब तक के अपने सफ़र पर पूरे विश्व में अपना नाम कायम रखा है इसने हमारे देश का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया हैइससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हमारे इसरो के वैज्ञानिक कितने काबिल हैं जो अंतरिक्ष के क्षेत्र में सीमित संसाधनों से विकसित देशों को पीछे छोड़ रहे हैं इस रोग में ऐसे कई विज्ञानिक हुए जिन्होंने अपना पूरा का पूरा जीवन संगठन को समर्पित कर दिया और उन्होंने कभी विवाह नहीं किया।

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