भारत में बेरोजगारी बड़ी सिपाही की भर्ती में दौड़े डॉक्टर और इंजीनियर

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महाराष्ट्र में 1137 पद के लिए 200000 लोगों ने डाली आवेदन. यह आवेदन महाराष्ट्र पुलिस में सिपाही के पद के लिए था जिसमें से कई डॉक्टर इंजीनियर वकील और बड़ी योगिता धारी लोग शामिल हुए.

भारत में बेरोजगारी की मार बढ़ती ही जा रही है. आज से 20- 25 साल पहले कहा जाता था, कि अगर आपके पास कोई बड़ी डिग्री है तो आप आसानी से कोई भी नौकरी पा सकते हैं आप अपनी योग्यता के अनुसार कोई कुछ पदाधिकारी बन सकते हैं.

लेकिन यह सब बातें बहुत ही पुरानी हो गई है जो आज के समय पर मायने नहीं रखती. अब बेरोजगारी इतनी बढ़ गई है कि अच्छे खासे पढ़े लिखे लोग भी अब छोटी-मोटी नौकरियों के लिए उन्हें मशक्कत करनी पड़ रही है. ऐसा ही कुछ दिखा गया महाराष्ट्र में जहां 1137 पदों के लिए सिपाही की बहाली होनी थी जिसमें 200000 से भी अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन दिया था.

महाराष्ट्र में कांस्टेबल पद पर भर्ती के लिए आयोजित दौड़  में डॉक्टर इंजीनियर समेत कई उच्च शिक्षा प्राप्त आवेदकों ने दौड़ लगाई इसके अलावा LLB इंजीनियरिंग और बीएड डिग्रीधारकों ने भी बड़ी संख्या में आवेदन कर सबको हैरान कर दिया है मालूम हो कि इस पद के लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं पास रखी गई है.

सिपाही भर्ती में कुछ योग्यताधारी द्वारा आवेदन

कांस्टेबल के 1137 पदों के लिए लगभग 200000 लोगों ने आवेदन दिया यानी 175 लोगों पर एक पद. आवेदन करने वाले लोगों में 3 डॉक्टर, 5 वकील, 423 इंजीनियर, 137 MBA, 543 PG, 28 B.Ed और 154 मास्टर डिग्री धारी और डेढ़ लाख से भी ज्यादा ग्रेजुएट है. वही महाराष्ट्र पुलिस के इंस्पेक्टर जनरल रविंद्र कुमार सिंह इस परिवर्तन को महाराष्ट्र पुलिस के लिए मनोबल बढ़ाने वाला कदम मानते हैं आवेदनकर्ताओं में कल्याण कि रूपाली गूंगा डे भी है. MBA कर चुकी रूपाली देश सेवा के लिए पुलिस में भर्ती होना चाहती है.

वही आवेदन करने वाले ज्यादातर इसके लिए बेरोजगारी को बड़ी वजह बता रहे हैं लेकिन कुछ इसे भ्रष्टाचार से जोड़कर भी देख रहे हैं.

एक एम एड डिग्री धारक के मुताबिक डिग्री होने के बाद भी नौकरी के लिए 15 से ₹20000 की मांग की जाती है इसके बाद भी पूरी वेतन मिलना या फिर मिलेगा इसकी कोई गारंटी नहीं होती सिपाही की नौकरी में पैसे के साथ-साथ सुरक्षा को भी लोग इसकी बड़ी वजह मानते हैं.

आज से 5- 10 साल पहले तक ऐसी स्थिति नहीं थी.

वही मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त अरूप पटनायक के अनुसार 2012 तक ऐसी स्थिति नहीं थी उन्होंने अपने कार्यालय में कांस्टेबल के पद के लिए आए हुए आवेदन में एक भी आवेदन डॉक्टर इंजीनियर अन्य किसी उच्च योग्यता धारी को नहीं देखा इसके लिए उन्होंने बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया है.

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