मनुष्य अंतरिक्ष में अपनी दूर-दूर की यात्रा के लिए तैयार हो रहा है। NASA बना रही है हाइबरनेशन स्लीपिंग चैम्बर

विज्ञानं

अपोलो मिशन के दौरान चंद्रमा तक अंतरिक्ष यात्री को पहुंचने में लगभग 3 दिन लग गए थे। ऐसे में यदि इंसान को इससे काफी और दूर यानी मंगल तक की यात्रा करनी है जो लगभग 6 महीनों तक का समय लग सकता है। NASA अब ऐसे स्लीपिंग तकनीक बना रही है जिससे इंसान हाइबरनेशन में जा सकता है, और अंतरिक्ष में लंबी दूरियां तय कर सकता है।

अपने हॉलीवुड के कई मूवी तो देखी होगी जिसमें यह दिखाया गया है कि कैसे मनुष्य अंतरिक्ष में दूर तक की यात्रा करते हैं। लेकिन जहां दूरियों की बात एक-दो दिन की नहीं बल्कि कई लाखों किलोमीटर और कई लंबी दूरियां जब इंसान को पहुंचने में कई साल लग जाते हैं। इन हॉलीवुड की मूवी में एक स्लीपिंग चैंबर, स्पेसक्राफ्ट के अंदर बनाए गए हैं। जिसमें इंसान गहरी नींद में सो कर एक हाइबरनेशन के कंडीशन में अंतरिक्ष में दूर तक की यात्रा करता है।

अब इस तरह के स्लीपिंग चैंबर, केवल हॉलीवुड की मूवी तक सीमित रहने वाली नहीं है। NASA ने भी इस से प्रेरित होकर ऐसे ही स्लीपिंग चैंबर बनाने की प्रक्रिया में काम करना शुरू कर दिया है। और मनुष्य को अगर अंतरिक्ष में दूर-दूर तक अपनी सफर को कायम रखना है तो यह जरूरी भी है। अपोलो मिशन के दौरान चंद्रमा मैं अंतरिक्ष यात्री को पहुंचने में लगभग 3 दिन लग गए थे। अगर हम मनुष्य सौर मंडल में कहीं और दूर का सफर करना चाहते हैं तो इससे भी ज्यादा समय लग सकता है। इसके अलावा अंतरिक्ष में कई जटिल समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।

अपोलो 11 के अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा में पहुंचने के लिए 3 दिन लगे, परंतु वापस लौटते हुए उन्हें 8 दिन का समय लगा। ऐसी परिस्थितियों में अंतरिक्ष यात्रियों को कई तरह की जटिल समस्याओं का सामना भी करना पड़ा था। बहुत यह तो बात रही केवल चंद्रमा तक जाने के लिए। लेकिन जब हम सौरमंडल में कुछ और आगे बढ़ने की ख्वाहिश रखते हैं जैसे की मंगल ग्रह तक तो दूरी और भी अधिक हो जाती है। एक तरफ के सफर में मंगल ग्रह तक पहुंचने के लिए इंसानों को 6 महीने लग सकते हैं। यानी अगर इंसान मंगल ग्रह तक का सफर करें जो उसे आने और जाने में लगभग 1 साल लग जाएंगे। साथ में अंतरिक्ष यात्रियों को कई तरह की आवश्यकता होगी जैसे खाद आपूर्ति ,व्यायाम ,विज्ञान स्टेशन, सोने के क्वार्टर और मनोरंजन की सुविधाओं और इन सारी चीजों के लिए स्पेसक्राफ्ट में कई सारे उपकरण लगाने पड़ेंगे। इस समस्या का समाधान निकालने के लिए नासा जोरो से काम कर रही है और उन्होंने इस समस्या का समाधान निकाल लिया है अंतरिक्ष यात्रियों को “टोरपोर” या हाइबरनेशन की स्थिति में डालकर दूर तक की यात्रा कराना।

इस समस्या का समाधान निकालते हुए Spaceworks Enterprises ने 2016 में नासा से 500000 डॉलर में अनुदान प्राप्त किया। अटलांटा स्थित इस कंपनी के डॉक्टर जॉन ब्रैडफोर्ड की अगुवाई में एक “टँअरपोरेशन” रणनीति मे काम करना शुरू किया। जिससे इंसान को एक हाइबरनेशन कंडीशन में दूर तक की यात्रा करना संभव हो सकता है। जो मंगल ग्रह के लिए सस्ते ,सुरक्षित और कम शारीरिक और मनोवैज्ञानिक रूप से अंतरिक्ष यात्रियों को लंबी यात्रा करा सकता है।

अगर ऐसा हुआ तो इंसान बड़ी सुगमता से सौर मंडल में लंबी दूरी की यात्रा करने में सक्षम हो जाएगा। फिलहाल तो यह प्रोजेक्ट अभी अपने प्रयोगिक प्रस्तुति में ही है। अभी तक इसका प्रयोग किसी अंतरिक्ष यात्रा के लिए नहीं किया जा सका है। स्पेस वर्क्स के प्रोजेक्ट मैनेजर जैकब वालो ने एक इंटरव्यू के दौरान यह कहा है “वह दिन अब दूर नहीं जब इंसान भी अपनी दूरी तक के सौरमंडल का सफर कर सकेगा, हम किसी स्पेसक्राफ्ट में टोरपोर स्टेट मैं अंतरिक्ष के आउटबाउंड और रिटर्न शिपमेंट के दौरान इन स्पेस आवास के द्रव्यमान और मात्रा को काफी कम कर सकते हैं, जो सिस्टम के लिए पूरे लॉन्च द्रव्यमान को कम कर देगा जिससे हम काफी लंबी दूरियों तक का सफर कर सकते हैं।”

अगर हम ऐसा करने में सफल रहे तो एक दिन जरूर हमारे मंगल ग्रह तक का सफर करने का सपना जरूर पूरा हो सकता है। अब यह मान सकते हैं कि फिल्मों में दिखाए जाने वाली स्लीपिंग चैंबर केवल हॉलीवुड के फिल्म तक ही सीमित नहीं रह गई है। अब जल्द ही वास्तविक जीवन में भी इनका उपयोग लंबी दूरी तक के सफर में सौरमंडल में किया जाने वाला है।

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