वाराणसी फ्लाईओवर हादसे में 18 की मौत इस प्रोजेक्ट से जुड़े चार अधिकारियों को सस्पेंड किया गया

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वाराणसी में फ्लाईओवर हादसे में 18 लोगों की मौत प्रोजेक्ट से जुड़े हुए अधिकारियों को सस्पेंड किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में निर्माणधीन पुल गिर जाने से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है। वही तीन लोगों को बचाया जा चुका है और कई लोगों के घायल होने की सूचना है। इस घटना का संज्ञान लेते हुए लापरवाही के चलते फ्लाईओवर के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर समेत चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। फ्लाईओवर का निर्माण करने वाली कंपनी उत्तर प्रदेश स्टेट ब्रिज कारपोरेशन करवा रही थी।वहीं यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सरकार के तरफ से मृतकों के परिवार को 5-5 लाख रूपय की मदद का घोषणा किया है।

हादसे का कारण?

आपको बता दें कि कल शाम बनारस में कैंट स्टेशन के पास फ्लाई ओवर का एक बड़ा स्लैब गाड़ियों के ऊपर गिर गया था। यह फ्लाईओवर अभी बन रही थी और इसके नीचे से काफी ट्राफिक गुजरा करता था । फिलहाल राहत और बचाव का काम जोर शोर से जारी है। वही स्थानीय लोगों ने बताया है कि जो भीम गाड़ी के ऊपर गिरी थी वह 2 महीने पहले ही रखा गया था लेकिन उसे ब्लॉक नहीं किया गया था हादसे के बाद चारों तरफ चीख-पुकार अफरा तफरी मच गई थी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देर रात हादसे वाली जगह का दौरा करने पहुंचे, सीएम योगी ने जिला प्रशासन लोक ,निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभाग को बचाव और राहत कार्य युद्ध स्तर पर चलाने का निर्देश देते हुए राहत और बचाव कार्य के लिए NDF की टीम वहां मौजूद थी। सीएम योगी आदित्यनाथ अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा, कि इस हादसे में घायल लोगों को समुचित चिकित्सा व्यवस्था और हर संभव मदद सुनिश्चित किया जाए।

पीएम मोदी ने जताया दुख

पीएम मोदी ने राजधानी दिल्ली में बीजेपी कार्यकर्ता को संबोधित करते हुए हादसे पर दुख जताया ।उन्होंने कहा, कि उन्हें कर्नाटका में जीत की खुशी है । लेकिन बनारस में हुए हादसे से मन भारी है।

जांच के लिए टीम गठित

यूपी के CM आदित्यनाथ द्वारा इस घटना की जांच के लिए 3 वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम गठित की गई है जिसमें कृषि उत्पादन आयुक्त आरपी सिंह मुख्य अभियंता सिंचाई भूपेंद्र शर्मा और जल निगम के प्रबंध निदेशक राजेश मित्तल को नामित किया गया है मुख्यमंत्री ने टीम को घटना की पूरी जांच और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही प्रस्तावित करने और तकनीकी व अन्य सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट 48 घंटो के अंदर मांगा है।