श्रीदेवी का स्टारडम के सामने फीके पड़ गए थे अनिल कपूर जिसके चलते अनिल कपूर ने रिजेक्ट कर दिया था दो फिल्में

मिर्च मसाला

बॉलीवुड फिल्म जगत में ऐसे किस्से आए दिन सुनने को मिलते हैं। आज हम बात करने वाले हैं सब के दिलों की धड़कन श्रीदेवी के स्टारडम के आगे अनिल कपूर फीके पड़ गए थे जिसके चलते अनिल कपूर को रिजेक्ट करनी पड़ी थी दो फिल्में

श्रीदेवी और अनिल कपूर दोनों ही 80 के दशक में “मिस्टर इंडिया” से लेकर “लम्हे” तक एक साथ कई हिट फिल्में कर चुके थे। दोनों ही की जोड़ी को दर्शक काफी पसंद भी करते थे। दोनों का ऑनस्क्रीन रोमांस उस समय लोगों को काफी ज्यादा पसंद आता था। लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब अनिल कपूर, श्रीदेवी से नफरत से करने लगे थे। इसके चलते उन्होंने श्रीदेवी के साथ दो फिल्में करने से मना कर दिया था।

दरअसल बात यह थी कि जब भी दोनों की कोई फिल्म है रिलीज होती है तो सारा का सारा स्टारडम और क्रेडिट श्रीदेवी ले जाती। दोनों ही बॉलीवुड के कलाकार अपने कैरियर के पीक पर थे। इसके चलते अनिल कपूर को श्री के स्टारडम से डर लगने लगा था।

सीनियर जर्नलिस्ट सुभाष के झा ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘ धीरे-धीरे श्रीदेवी, अनिल कपूर से ज्यादा बड़ी स्टार बन गई थी। जिसे अनिल कपूर बर्दाश्त नहीं कर पाए थे। इसी के चलते अनिल कपूर ने श्रीदेवी के साथ दो ब्लॉकबस्टर फिल्मों को रिजेक्ट कर दिया था और यही अनिल कपूर की सबसे बड़ी भूल थी जिस पर बाद में उन्हें पछतावा हुआ था।

1989 को रिलीज हुई “चालबाज” और 1989 में ही रिलीज हुई दूसरी फिल्म “चांदनी”। जब अनिल कपूर को लगता था कि हीरो का किरदार हीरोइन के मुकाबले दमदार नहीं है तो वह फिल्म करने से मना कर देते थे इसी के चलते उन्होंने इन दोनों फिल्मों को रिसेट किया था। इसी के चलते उन्होंने 1987 में आई “मिस्टर इंडिया” किया था जिसमें हीरो का किरदार दमदार था।

इसके बाद 16 अप्रैल 1993 को बोनी कपूर ने श्रीदेवी और अनिल कपूर को लेकर “रूप की रानी चोरों का राजा” फिल्म बनाई। यह फिल्म उस समय की सबसे महंगी फिल्मों में से एक थी। इसके बावजूद यह फिल्म 1993 में फ्लॉप साबित हुई। इसी के बाद श्रीदेवी और अनिल कपूर के बीच स्टारडम को लेकर लड़ाई समाप्त हुए।

जब श्रीदेवी का निधन हुआ तब अनिल कपूर धोनी के परिवार के साथ मजबूती से खड़े रहें खबरों की मानें तो जहान्वी और खुशी मां के निधन के बाद अनिल कपूर के घर शिफ्ट हो गई थी। अनिल अंदर से इतना मजबूत है किसी देवी की आखिरी यात्रा के समय भी इन्होंने अपनी आंख से आंसू नहीं आने दिया था।

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