“साइनाइड” एक ऐसा ज़हर जिसे इंसान पल भर में मर जाता है

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आपने कई मूवीस, जासूसी ,किताबें मर्डर मिस्ट्री, से जुड़ी कई कहानियां तो पढ़ी होगी। जिसमें अपने आप को बहुत ही चालाक समझने वाले अपराधी साइनाइड का इस्तेमाल करते हैं। साइनाइड के बारे में कहा जाता है, की यह सबसे तेज जहर है और इसे चखने वाला व्यक्ति इसका स्वाद बताने से पहले ही मर जाता है लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि हमारे द्वारा रोजमर्रा की जिंदगी में प्रयोग में लाए जाने वाले बहुत रसायन और खाद पदार्थ मैं भी सायनेट की बहुत सूक्ष्म मात्रा होती है आज हम आप लोगों को यह बताएंगे कि साईनाथ क्या है और यह शरीर पर कैसे असर करता है और इसकी कितनी मात्रा जानलेवा साबित होती है और इसका स्वाद कैसा होता है।

सायनाइड क्या है?

साइनाइड साबुन रसायनिक कंपाउंड के लिए प्रयोग किया जाता है जिनमें कार्बन और नाइट्रोजन के बांड होते हैं।

यह रासायनिक बांड रसायनिक कंपाउंड में  होते हैं लेकिन वह सबसे प्राणघातक रूप में जहरीले नहीं होते, सोडियम साइनाइड (NaCN), पोटेशियम साइनाइड( KCN), हाइड्रोजन सायनाइड(HCN), यह सब प्राणघातक रसायन है इनके अलावा निटीरिल्स के हजारों कंपाउंड्स में साइनाइड के कई ग्रुप्स पाए जाते हैं और यह आइटम्स जहरीले नहीं होते बहुत से नाइट्रइल का उपयोग दवाई बनाने में भी किया जाता है। नाइट्रोजन साइनाइड जितने खतरनाक नहीं होते क्योंकि वह अपना CN – आयन रिलीज नहीं करते अगर यह नहीं रिलीज करते तो यह हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म के लिए अत्यंत घातक जहर का काम करता है।।

साइनाइड कैसे असर करता है

साइनाइड शरीर की कोशिका को ऊर्जा देने के लिए जरूरी ऑक्सीजन की सप्लाई रोक देता है ।यह कोशिका के पावर हाउस के नाम से प्रसिद्ध माइटोकांड्रिया में पाए जाने वाले एंजाइम्स साइटोक्रोम C ऑक्साइड मैं मौजूद आयरन से जुड़ा हो होता है। साइटोक्रोम से एक्सीडेंट एंजाइम्स एरोबिक सेलुलर रेस्पिरेशन की प्रक्रिया में ऑक्सीजन को इलेक्ट्रॉन्स सप्लाई नहीं करता । माइट्रोकांड्रिया को ऑक्सीजन नहीं मिलने पर या ऊर्जा उत्पन्न करने वाले अनु कटम नहीं बना पाता , हृदय की मांसपेशियों के उसकी ओर तांत्रिक कोशिकाओं को इस एटम के टूटने से जो एनर्जी मिलती है जो भी आइटम उपलब्ध नहीं होता है तो कोशिका बहुत ही कम समय में ही अपना सारी ऊर्जा खोकर मर जाती है हृदय की कोशिका का मरने का अर्थ है,  यह काम करना बंद कर देती है और तंत्रिका कोशिका के काम करना बंद करते ही शरीर में मस्तिष्क से या मस्तिष्क को सूचना का संचार बंद हो जाता हैऔर बहुत बड़ी संख्या में कोशिकाएं मर जाती है तो मृत्यु हो जाती है।

कुछ फल व सब्जियों में साइनाइड cyanoglycoaides के रूप में पाया जाता है । इन फलों में उत्पन्न होने वाले गुलकोज के साथ रिएक्शन करके, यह हाइड्रोजन सायनाइड गैस रिलीज करते हैं। उद्योगिक प्रक्रिया में भी बहुत सारे सामान बनाने के लिए ऐसी सामग्री का उपयोग किया जाता है जिसमें साइनाइड के कंपाउंड होते हैं । यह कंपाउंड अन्य मेटेरियल के साथ संपर्क में आने पर साइनाइड बनते हैं, कागज ,कपड़ा ,फोटो केमिकल, प्लास्टिक ,खनन, धातु कर्म के उद्योग में साइनाइड का प्रयोग किया जाता है। आमतौर पर कड़वे बादाम दिगंत को भी साइनस से जोड़ा जाता है लेकिन हर विषैला साइनाइड पदार्थ गंध नहीं छोड़ता साइनाइड की गैस है हवा से हल्की होने के कारण यह वातावरण में ऊपर उठ जाती है।

साइनाइड की गैस की बड़ी मात्रा फेफड़ों में चले जाने से इंसान बेहोश हो जाता है और उसकी मृत्यु भी हो सकती है इसकी मात्रा कम होने से मृत्यु नहीं होती लेकिन तत्काल चिकित्सा की जरूरत पड़ती है साइनाइड पोइज़निंग के लक्षण अन्य विषैली रसायनों के लक्षण जैसे ही होते हैं इसलिए कभी-कभी यह बताना बहुत ही मुश्किल हो जाता है की इसकी मृत्यु साइनाइड के कारण ही हुई है।

शरीर में साइनाइड का प्रवेश होने पर तत्काल प्रकट होने वाले लक्षण है सिर दर्द चक्कर आना कमजोरी कन्फ्यूजन थकान तालमेल में कमी आदि साईं नाथ के अधिक मात्रा या देर तक इस के संपर्क में रहने पर प्रकट होने वाले लक्षण है ब्लड प्रेशर में गिरावट बेहोशी दिल का दौरा पड़ना हृदय गति कम हो जाना फेफड़ों को नुकसान पहुंचाना सांस लेने में कठिनाई और यहां तक की इंसान कोमा में भी जा सकता है

साइनाइड से होने वाली मृत्यु का मुख्य कारण दम घुटना या हार्ट अटैक होता है । साइनाइड के संपर्क में आने वाले व्यक्ति स्किन ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाने के कारण तेरी जैसी लाल हो जाती है या फिर नीला पड़ जाता है इसके अलावा स्किन और शरीर से निकलने वाला लिक्विड में कड़वे बादाम की गंध आती है।

साइनाइड की कितनी मात्रा प्राणघातक होती है?

यह इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर में साइनाइड के प्रवेश का माध्यम है, मार्ग क्या है क्या है, कितनी मात्रा में शरीर में गया है ,और व्यक्ति कितनी देर तक इस के संपर्क में रहा है । सांस के द्वारा शरीर में जाने वाला साइनाइड अधिक प्राणघातक होता है। साइनाइड का स्क्रीन में संपर्क होने पर गंभीर क्षति होने की संभावना कम होती है । लेकिन यह उंगलियों य हाथ के माध्यम से मुंह में जाकर गंभीर क्षति कर सकता है । हर प्रकार के साइनस की मात्रा का शरीर पर अलग-अलग प्रभाव होता है । लेकिन यह अनुमान है कि आधा ग्राम साइनाइड 70 किलो के व्यक्ति के प्राण ले सकता है। साइनाइड की अधिक मात्रा शरीर पर जाने से कुछ सेकंड में बेहोशी छा जाती है ,और व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है । यह कुछ-कुछ चीनी जैसा दिखता है साइनाइड को खाते ही कुछ लोगों ने बताया है कि इसका स्वाद चरपरा होता  हॉट जीव व गला तेजी से जलने लगता है।

साइनाइड के पॉइजनिंग का उपचार क्या है?

जैसे कि ऊपर क्या आर्टिकल में बताया गया है, प्रकृति में साइनाइड अनेक खाद्य पदार्थों में अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में होता है इसलिए हमारा शरीर इसके लिए हानिकारक प्रभाव से अपने आप ही निपट लेता है सेब के बीच में पाए जाने वाला बीज और सिगरेट के धुएं में भी साइनाइड होता है लेकिन इस शरीर को तत्काल गंभीर हानि नहीं पहुंचाता।

जब साइनाइड का प्रयोग हर जहर या रासायनिक हथियार के रूप में किया जाता है। तो उपचार उसकी मात्रा पर निर्भर करता है । यदी साइनाइड अधिक मात्रा में फेफड़ों में चला जाए तो इतनी तेजी से असर करता है ,कि उसका उपचार संभव नहीं है। सांस के रास्ते साइनाइड शरीर में चले जाने से व्यक्ति को खुली हवा में ले जाते हैं ,कम मात्रा में सांस या मुंह के रास्ते ली गई साइनाइड के लिए उपचार के रूप में रसायन दे जाते हैं जो साइनाइड को निष्क्रिय कर देते हैं प्राकृतिक रूप में पाए जाने वाले विटामिन  ब12,हाइड्रॉक्सिल माई साइनाइड से प्रतिज्ञा करके cyanocobalamin बनाता है जो पेशाब के दौरान बाहर निकल जाता है। लेकिन इसके बावजूद भी साइनाइड जहर से पीड़ित व्यक्ति हमेशा के लिए ठीक हो जाए यह कहा नहीं जा सकता क्योंकि ठीक होने के बावजूद व्यक्ति के अन्य अन्य अंग इसके जहर से प्रभावित होकर खराब हो जाते हैं या फिर काम करना बंद कर देते हैं जिससे पैरालाइसिस या कोमा मैं व्यक्ति चला जाता है।