सारे ग्रह सूर्य की परिक्रमा एक ही दिशा में क्यों करते हैं?

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आज से 6 अरबों वर्ष पहले हमारी आकाशगंगा में सौरमंडल नहीं था और ना ही सूर्य और ग्रहों का अस्तित्व था सौरमंडल के स्थान पर एक सोलर नेबुला था। यह धूल और गैस का एक बादल है यह बादल अपने आप एक दिशा में घूम रहा था इस से बनने वाले सभी ग्रह प्लैनेट्स भी उसी दिशा में घूम रहे हैं।

पर क्यों आपने कभी सोचा है। आज हम लोग इसी के बारे में चर्चा करने वाला है । धूल और गैस से बना वह सोलर नेब्यूला धीरे-धीरे घना होता गया। और इसके कई हिस्सों से सूर्य और ग्रह का निर्माण हुआ।  ग्रेविटी के कारण इसमें एंगुलर मोमेंटम बना, जिससे इसकी घूर्णन गति बढ़ गई और यह घूमते हुए बादल की एक डिस्क से बन गई यही कारण है कि इस दिल से बनने वाले सभी ग्रह लगभग एक ही तल पर एक ही दिशा में सूर्य की परिक्रमा कर रहे हैं।

इस बात को समझने के लिए सौरमंडल का निर्माण कैसे हुआ इसकी प्रक्रिया के बारे में जानना भी जरूरी  है ।वैज्ञानिकों का यह मानना है, कि धूल और गैस के बहुत विशाल बादल से बनने वाले सोलर सिस्टम और सारे ग्रह बने हैं।  गुरुत्व के कारण यह नेबुला अपने आपस में कॉलेप्से करने लगा और पदार्थ इसमें भंवर की तरह अपने केंद्र की ओर खींचने लगी भीतर गिरता हुआ पदार्थ केंद्र को सघन और गर्म करता चला गया। लेकिन बादल का बाहरी किनारा ठंडा बना रहा।

बादल के डेस्क और अधिक पतली होती गई और पदार्थ के कर एक दूसरे से चिपक कर पिंडो का निर्माण करने लगे, यह पिंड एक दूसरे से मिलकर और बड़े होते गए। इन्हीं पिंडों के एक दूसरे से टकराने से ग्रह और उनके उपग्रह बने। बादल के केंद्र के निकट पृथ्वी जैसे चट्टानी ग्रह बने क्योंकि उनका पदार्थ सूर्य की गर्मी को झेल सकता था। बादल के बाहरी किनारे ठंडा होने के कारण वह बर्फीले पदार्थ जमा होने लगे।  जिससे सौरमंडल के विशाल गैसीय ग्रहों का निर्माण हुआ। इसी बीच Badal केंद्र की ओर अधिक सघन होते चले गए। जब प्रेशर टेंपरेचर बढ़ता गया तो हाइड्रोज एक्टिव होने से नाभि की प्रक्रिया शुरू हो गई। और सूर्य जैसे तारे का निर्माण हुआ शेष बज गई बहुत सी गैस और धूल प्रबल सौर वायु के झोंके से अंतरिक्ष में बाह गई।

इस तरह सौरमंडल का निर्माण हुआ। इसीलिए सारे प्लैनेट्स एक ही दिशा में घूम रहे हैं।