रहस्यमय तथ्य विज्ञानं

क्या कभी आपने यह सोचा है कि दिमाग में याद है कहां शुरू होती है और अगर स्टोर होती भी है तो क्या हम कभी इन्हें कंप्यूटर में ट्रांसफर कर सकते हैं।

दोस्तों जैसे कि हम जानते हैं दिमाग कई छोटी छोटी और बड़ी यादों को अपने अंदर स्टोर करके रखता है ,चाहे वह कितनी भी पुरानी क्यों ना हो क्या बचपन की यादें ही क्यों ना हो लेकिन कैसे ऊपर के सवाल से आपने कुछ अंदाजा तो लगाया ही होगा कि कैसे हमारा दिमाग को स्टोर करता होगा।

हमारा मस्तिष्क या  दिमाग याद क्या स्मृति या मेमोरी बहुत सूक्ष्म सूक्ष्म रसायनिक परिवर्तनों के रूप में स्टोर करता है यह रासायनिक परिवर्तन दिमाग की कोशिका न्यूरॉन्स के बीच बनने वाले जोड़ों पर होती है।

हमारे दिमाग में लगभग एक खरब न्यूरॉन्स होते हैं इनमें से हर न्यूरॉन्स लगभग 10000 न्यूरॉन्स से भी जुड़ा होता एक अनुमान के मुताबिक हमारे दिमाग ऐसे लगभग 1000 अरब जुड़ों होते है। इन जुड़वों को सिनेपस कहते है।

कोई सूचना जब इन न्यूरॉन्स के सर्किट और नेटवर्क से होकर बहती है तो न्यूरॉन्स में होने वाली गतिविधि साइनस पॉइंट को प्रतिक्रिया करने में मजबूत या कमजोर होने का संकेत भेजती है सरपंच के मजबूत या कमजोर होने की कार्रवाई से दिमाग सूचना कंट्रोल करता है वास्तव में यह प्रक्रिया इतनी जटिल होती है कि इसे आसानी से नहीं समझा जा सकता इस मैकेनिज्म को लॉन्ग टप्रोटेटियासिओं LTP कहते है।

यहां से चीजें और अधिक जटिल होती जाती है। हमारे दिमाग में एक भाग होता है जिसे हिप्पोकैंपस कहते हैं या दिमाग का वह भाग है । जो मेमोरी स्कोर अलग-अलग तरह से हैंडल करता है एक तरह की मेमोरी वह होती है जिनका संबंध हम से होता है । इन्हें ऑटो बायोग्राफी कल मेमोरीज कहते हैं दूसरी तरह की मेमोरी से अन्य व्यक्तियों स्थान और घटनाओं से संबंधित होती है । उन्हें एपिसोड मेमोरीज कहते हैं लेकिन कुछ विज्ञान को कायम मानना है की मेमोरी हिप्पोकैंपस में अस्थाई रूप में रहती है और बाद में उनकी दोबारा कोडिंग होती है और वह दिमाग के भाग में वितरित कर दी जाती है इस प्रक्रिया को स्मृति एकत्रीकरण कहते हैं और यह तब होता है जब हम सो रहे होते हैं यह न्यूरोसाइंस का सबसे बड़ा रहस्य है और अनेक दशकों से इसकी खोज की जा रही है की अरबों खरबों सिनेपसमैं दीर्घकालीन मेमोरीज कैसे स्टोर हो सकती है।

कथात्मक ज्ञान  व्यवहारिक कौशल से जुड़ी मेमोरीज अलग-अलग तरह से स्टार्ट होती है यही कारण है कि हम साइकिल चलाना ड्राइविंग तैरना जैसे कौशल कभी नहीं भूलते लेकिन गणित के सूत्र और शब्दों की स्पेलिंग भूल जाते हैं।

शॉर्ट टर्म मेमोरी भी दूसरी तरफ से काम करती है आप किसी फोन नंबर को कुछ पलों के लिए याद कर लेते हैं लेकिन उतनी ही तेजी से भूल भी जाते हैं अनुभव का दोहरा वा होता है जैसे किसी फोन नंबर को बार बार इस्तेमाल करना से शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉन्ग टर्म सिस्टम में चली जाती है।

मनुष्य की मेमोरी विज्ञान के कुछ अनसुलझे रहस्य में से एक है न्यूरोसाइंस के एक उप स्वास्थ्य में केवल इससे जुड़ी बातों का ही अध्ययन किया जाता है फिर भी आप इतनी जटिल है कि हम इसके बारे में बहुत कम जानते हैं यह बहुत बड़ा प्रश्न है कि दिमाग की न्यूरॉन्स किस प्रकार से मेमोरीज का रिकॉर्ड करते हैं।

लेकिन यह हमारी सबसे बड़ी समस्या नहीं हैसबसे बड़ी समस्या यह है कि मैं मर इसके बारे में हम जितना भी जानते हैं उसे स्पष्ट होता है कि मनुष्य का दिमाग मेमोरी को कंप्यूटर की भांति किसी बंबोरी मौजूद इंस्टॉल करके नहीं लगता कंप्यूटर में लॉक स्टोरेजअलग-अलग पार्ट्स जैसे RAM,हार्ड डि फ़्लैश ड्राइव ऑडिटर क्लब रिस्टोर रहती है लेकिन दिमाग में मेमोरी उसे न्यूरल नेटवर्क में फैली रहती है जो उन्हें कोशिश करता है इसके परिणाम स्वरुप मेमोरी स्कोर उस सिस्टम से निकालकर कहीं और ट्रांसफर नहीं किया जा सकता जो इन्हें स्टोर रिकॉर्ड कर सके।

साफ-साफ कह  किसी दिमाग में स्टोर मेमोरीज को पढ़ सकने के लिए हमें उसे पूरे दिमाग को शरीर से बाहर सानू लेट करना पड़ेगा जो फिलहाल असंभव है।