HIV AIDS की शुरुआत कहां से हुई, इसके वायरस मरते क्यों नहीं है?

रहस्यमय तथ्य

AIDS एक जानलेवा बीमारी है, इसका कोई उपचार भी नहीं है, हर साल कई हजारों लोगों की मृत्यु किस रोग के कारण हो जाती है।

विज्ञानिकों ने एड्स महामारी की उत्पत्ति का पता लगाया है और कहां जा रहा है किसकी उत्पत्ति केंसास शहर में हुई जो कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की राजधानी है। इस बीमारी ने पूरी दुनिया में 30 साल पहले दस्तक दी थी। आज 30 से 40 साल बाद इसकी उत्पत्ति के स्थान का पता लगा है। साइंस जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि विज्ञानिकों ने वायरस के जेनेटिक कोड के नमूने का विश्लेषण किया है, इससे यह प्रमाणित होता है कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की राजधानी किंशासा से हुआ है।

कांगो की राजधानी में तेजी से बढ़ती वेश्यावृत्ति आबादी और दवाइयों की दुकान में संक्रमित सुइयों का उपयोग संभवता इस वायरस के फैलने का कारण बना है। दुनिया भर की नजरों में एचआईवी एड्स वायरस 1980 के दशक में आया था। आज दुनिया भर में लगभग 7.50 करोड़ लोग एचआईवी से ग्रसित है।

इस बीमारी का कोई उपचार क्यों नहीं होता

एचआईवी एड्स वायरस द्वारा होने वाली बीमारी है। यह रोग रोगी व्यक्ति के प्रतिरक्षा तंत्र के सहायता के बिना ठीक नहीं किया जा सकता। ऐसे बहुत कम वायरस रोधी दवा है या एंटीवायरस दवाइयां है जो अपना काम अच्छी तरह से करती है। ज्यादातर एंटीवायरस दवाइयां वायरसों को बढ़ने को रोकने की प्रक्रिया को कम कर देती है, ताकि शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र संक्रमण का सामना करने के लिए सक्षम हो सके। अगर देखा जाए तो सभी एंटीवायरस और एंटीबैक्टीरियल दवाओं का एक ही लक्ष्य होता है,- वे रोगी के शरीर की कोशिकाओं को कम से कम नुकसान पहुंचाते हुए रोगाणु को खत्म करना चाहती है। इसका अर्थ यह है कि रो गानों से संबंधित किसी ऐसे खास पहलू को प्रभावित करती है जो रोगों के शरीर में नहीं होता। लेकिन वायरस रोगी के शरीर के भीतरी होस्ट कोशिका में पनपता है। इसका अर्थ यह है कि वायरस कि जैव रासायनिक और होस्ट कीजिए और रासायनिक में बहुत अधिक अंतर नहीं होता। इसके अलावा अगर बात करें तो बेकरिया शरीफ में मुक्त रूप में रहते हैं और उनकी जैव रासायनिक की और सेल कोशिका है विशेषताएं उनकी अपनी होती है। यह ही एक मुख्य कारण है कि एंटीबैक्टीरियल दवाओं की संख्या बहुत ज्यादा है लेकिन एंटीवायरस दवाओं की संख्या बहुत कम है।

डॉक्टर से भी मानते हैं कि वायरसों में म्यूटेशन बहुत तेज गति से होता है। ऐसे करने में सक्षम वायरसों की जैव रासायनिक की हो उसकी जेब रसायनिक की से बहुत भिन्न होती है। वह ब्यूटीशन होने के कारण दवा के प्रभाव में आने से बच जाते हैं।

इस प्रकार यही कारण से HIV के बारे में आसमा ने बात किया है कि इस पर बहुत ही कम दवाओं का असर होता है, लेकिन वास्तव में HIV के लिए हमारे पास अन्य सभी वायरसों को मिलाकर भी कोई अधिक प्रभावी दवा है नहीं है। लेकिन समस्या यह है कि अन्य वायरसों के विपरीत HIV के लिए शरीर की प्रतिरक्षा आत्मक प्रतिक्रियाओं को सक्रिय करने में बहुत कठिनाई आती है। HIV का उपचार करना असंभव नहीं है लेकिन इसके लिए रोगी के भीतर प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने की जरूरत पड़ती है जो वायरस के कारण लगभग खत्म होने की अवस्था में पहुंच जाती है। जिससे रोगी के अंदर अन्य रोगों से लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता खत्म कर देती है।

HIV एड्स का वायरस आखिर आया कहां से?

ऑक्सफोर्ड और बेल्जियम की यूनिवर्सिटी किशोर टीमों ने HIV की” फैमिली ट्री” के बारे में शोध किया। इस शोध में वैज्ञानिकों के मुताबिक HIV वायरस चिंपांजी वायरस का परिवर्तित रूप है, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक कांगो की राजधानी किंशासा विस्मित का एक बड़ा बाजार था और संभवता संक्रमित खून के संपर्क में आने से हम मनुष्य तक पहुंचा। HIV के वायरस कई तरह से फेल सकते हैं, इन वायरस होने सबसे पहले चिंपांजी, गोरिला, बंदर फिर मनुष्य को अपने प्रभाव में लिया होगा।

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की राजधानी किंशासा मे तेजी से बढ़ती वेश्यावृति इसका मुख्य कारण भी हो सकती है। किंशासा मे 1962 या 1966 के आसपास तेजी से लिंगानुपात गिरा था। जिसमें लिंग अनुपात प्रति दो स्त्रियों पर हजार थे। जिसके चलते कांगो में अत्यधिक वेश्यावृत्ति होने लगी। सिर्फ यही एक मुख्य कारण नहीं था ,अस्पतालों दुकानों में संक्रमित सुइयों का उपयोग भी इस बीमारी के फैलने का मुख्य कारण माना जाता रहा है। यह दोनों प्रकार के वायरस लगभग एक ही तेजी से फैल तरह स्वास्थ्य शिविरों में धड़के से इस्तेमाल होरी संक्रमित सुइयों ने इस वायरस को मानो पंखी लगा दिए थे। प्रोफेसर पाइबस जो कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर है HIV के फैलने की और एक बड़ी वजह यह भी मानते हैं कि वह था, कांगो का रेल नेटवर्क। 1940 के अंत तक लगभग 1000000 लोग आवागमन के लिए रेल नेटवर्क का इस्तेमाल करते थे।

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