(Inspirational Story) एक 20 वर्ष के लड़के ने खड़ी की करीब 360 करोड़ की बिजनेस।

विज्ञानं

OYO Rooms ऑनलाइन होटल बुकिंग साइट है, आपने इसका नाम तो सुना ही होगा। OYO को बनाया है महज 20 वर्ष के एक लड़के रितेश अग्रवाल ने, उनका यह ऑनलाइन होटल बुकिंग पोर्टल अब 360 करोड़ का हो गया है। उनके जीवन की कहानी बहुत दिलचस्प और प्रेरणादायक है।

यह विश्वास करना बहुत मुश्किल है कि ऐसे कम उम्र में जब आप खुद को पूरी जिंदगी के लिए तैयार करते हैं और कॉलेज के मौज मस्ती हो में डूबे रहते हैं। लेकिन वह आज 20 वर्ष की उम्र में एक युवा ने बहुत बड़े सपने देखते हुए कुछ कर दिखाने की सूची और कुछ बड़ा करने का मन बनाया। जी हां आज हम बात करने वाले है, Oyo Rooms नाम की कंपनी बनाने वाले एक 20 वर्षीय युवक की जिन्होंने 16 घंटे काम करके 360 करोड रुपए की कंपनी का नींव रखा। 20 वर्ष के कम उम्र में मिश्रा के कंपनी शुरुआत कर बड़े-बड़े अनुभवी उद्यमी और निवेशकों को भी उन्होंने आज चकित कर दिया। ओयो रूम्स मुख्यता एक ऑनलाइन वेबसाइट है जिसकी मदद से आप देश के बड़े-बड़े शहरों के होटल में कमरा बुक कर सकते हैं। जी हां रितेश अग्रवाल दिखने में पतले, लंबे और बिखरे बालों वाले बिल्कुल किसी कॉलेज के आम विद्यार्थी की तरह देखते हैं। लेकिन कभी-कभी सामान्य से दिखने वाले लोग भी ऐसे काम कर जाते हैं जिसकी आपको उम्मीद नहीं होती रितेश भी एक ऐसे ही युवा उद्यमी है जिन्होंने मात्र 21 साल की छोटी सी उम्र में अपने अनुभव सही अवसर को पहचानने की क्षमता और मेहनत के बल पर अपने विचारों को वास्तविकता के रूप में दिया।

रितेश अग्रवाल को बचपन से ही बिजनेस के बारे में सोचने समझने मैं ज्यादा रुचि थी। इससे ज्यादा सबसे बड़ी भूमिका उनके परिवारिक पृष्ठभूमि की थी। उनका जन्म 16 नवंबर 1993 को उड़ीसा राज्य के जिले कटक बिसाम के एक व्यवसाई परिवार में हुआ है। उन्होंने 12वीं तक की अपनी पढ़ाई जिले के ही सेक्रेड हार्ट स्कूल में कि इसके बाद उनकी इच्छा IIT में दाखिले की हुई। IIT की तैयारी के लिए वे राजस्थान के कोटा चले गए। राजस्थान के कोटा में जाने के बाद अब उनके पास सिर्फ दो ही काम थे पहला पढ़ाई करना और दूसरा छुट्टियों के दिनों में खूब घूमना। यहीं से ही उनकी रुचि ट्रेवलिंग में बड़े लगी कोटा में उन्होंने एक किताब लिखी – Indian Engineering collages: A Complete Encyclopedia of Top 100 Engineering Collages इस किताब के नाम से ही आप को यह साफ साफ पता चल रहा है कि यह किताब भारत के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज के बारे में है। इस किताब को देश की सबसे प्रसिद्ध ई कॉमर्स साइट फ्लिपकार्ट पर बहुत पसंद किया गया। 16 वर्ष की उम्र में उनका चुनाव मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIRF) में आयोजित एशियन साइंस कैंप के लिए किया गया। यह कैंप 1 वर्षीय संवाद मंच है जहां एशियाई मूल के छात्र शामिल किसी क्षेत्र विशेष की समस्या पर विचार विमर्श कर विज्ञान और तकनीक की मदद से उसका हल ढूंढा करते हैं। यहां आने पर भी वह छुट्टियों के दिनों में खूब घूमा किया करते थे और हटाने के लिए सस्ते दामों पर उपलब्ध होटल्स का प्रयोग करते थे। पहले से ही रितेश की रुचि बिजनेस में बहुत थी और इस क्षेत्र में मैं कुछ करना चाहता था। लेकिन बिजनेस किस चीज का किया जाए इस बात को लेकर वह अभी भी स्पष्ट नहीं है। कई बार वह कोटा से ट्रेन पकड़कर दिल्ली आ जाया करते थे और मुंबई की तरह रास्ते होटल में रुक दें ताकि दिल्ली में होने वाले युवा उद्यमियों के आयोजन और सम्मेलन में शामिल होकर नए युवा उद्यमियों और स्टार्टअप फाउंडर से मिल सके। कई बार इन इवेंट्स में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन शुल्क इतना ज्यादा होता था कि उनके लिए उसे दे पाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए कभी-कभी वह इन आयोजनों में चोरी चुपके जा बैठते, यही वह वक्त था जब उन्होंने ट्रैवलिंग के दौरान हटाने के लिए प्रयोग किए गए सस्ते होटल्स के बारे अनुभवों को अपने बिजनेस का रूप देने की सोच रखी।

ORAVEL STAYS से शुरुआत की

वर्ष 2012 में उन्होंने पहला स्टार्टअप Oravel stays शुरुआत की। इस कंपनी का उद्देश्य प्रॉब्लम्स को छोटी अंबज्ञ अवधि के लिए कम दामों पर कमरों को उपलब्ध कराना था। जिसे कोई भी आसानी से ऑनलाइन बुक कर सकता था कंपनी के शुरू होने के कुछ ही महीनों के अंदर उन्हें नए स्टार्टअप में निवेश करने वाली कंपनी Venture Nursery से 3000000 का फंड भी प्राप्त हो गया। फब रितेश अग्रवाल के पास अपनी कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त पैसे थे। उसी समय अंतराल में उन्होंने अपने इस बिजनेस आइडिया को Theil fellowship, जोकि ट्रिपल कंपनी के साथ संस्थापक पीटर थैल के” थैल फॉउंडेशन” द्वारा आयोजित एक वैश्विक प्रतियोगिता है के समक्ष रखा। और सौभाग्यवश हुआ है इस प्रतियोगिता में दसवां स्थान प्राप्त करने में सफल रहे और उन्होंने फेलोशिप के रूप में लगभग 6600000 की धनराशि प्राप्त हुई। बहुत ही कम समय में उनके नए स्टार्टअप को मिली इन सफलताओं से वह काफी उत्साहित हुए और वह अपने स्टार्टअप पर और बारीक व सावधानी से काम करने लगे। लेकिन पता नहीं क्यों उनका यह बिजनेस मॉडल उन्हें लाभ देने में असफल रहा और Oreval stays घाटे में चला गया। विभिन्न स्थितियों को जितना सुधारने का प्रयास करते हैं, स्थितियां और खराब होती जाती और अंत में उन्हें इस कंपनी को अस्थाई रूप से बंद करना पड़ा।

Oravel Stays नया रूप में Oyo Rooms

रितेश अपने स्टार्टअप्स के असफल होने से निराश नहीं हुए और उन्होंने दोबारा खुद से शुरू की गई अपनी योजनाओं पर विचार करने की सोची ताकि इसकी कमियों को दूर किया जा सके। तब उन्होंने यह अनुभव हुआ कि भारत में सस्ते होटल से मिलना ना मिला कोई समस्या नहीं है, दरअसल कमी है होटल्स कम पैसे में बेहतरीन और मूलभूत सुविधाओं को प्रदान कर पाना। विचार करते हुए उन्होंने अपनी यात्राओं के दौरान बजट होटल्स में ठहरने के उन अनुभवों को याद किया जब उन्हें कभी-कभी दो ज्यादा पैसे देने के बाद भी गंदे और बदबूदार कमरे मिलते और कभी-कभी कम पैसों में ही आरामदायक और सुविधा पूर्ण कमरे मिल जाते। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने पहले के स्टार्टअप Oravel stays मैं बदलाव करते हुए प्रॉब्लम्स की सुविधाओं को ध्यान में रख उन्हें नए रुप में प्रस्तुत किया। और 2013 में फिर से और Oravel को लांच किया गया, Oyo Rooms के नाम से। जिसका मतलब होता है “आपके अपने कमरे”। ओयो रूम्स का उद्देश्य अब सिर्फ प्रॉब्लम्स को किसी होटल में एक कमरा मुहैया कराना भर नहीं रह गया था। अब होटल के कमरों की और वहां मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं की गुणवत्ता का भी ख्याल रखने लगे और इसके लिए कंपनी एक उच्च मानकों को भी निर्धारित किया। अब जो भी होटल आयो रूम्स के साथ जुड़ अपने सेवाएं देना चाहता है उसे सबसे पहले कंपनी से संपर्क करना होता है। इसके पश्चात कंपनी के कर्मचारी उस होटल में वाह-वाह के कमरे और अन्य सुविधाओं का निरीक्षण करते हैं। अगर वह होटल को योग के सभी मानकों पर खरा उतरता है तभी वह Oyo के साथ जुड़ सकता है अन्यथा नहीं।

इस बार रितेश अग्रवाल की मेहनत रंग लाई और सब कुछ वैसा ही हुआ जैसा वह चाहते थे। किफायती दामों पर बेहतरीन सुविधाओं के साथ ट्रेवलर्स को यह सेवा बहुत पसंद आने लगी। धीरे-धीरे ग्राहकों की मांग को पूरा करने के लिए कंपनी में कर्मचारियों की संख्या 2 से 15 ,15 से 20, 20 से 40 होती चली गई। और आज वर्तमान समय में Oyo रूम्स मे कर्मचारियों की संख्या 1500 से भी ज्यादा है।

कंपनी के स्थापित होने के 1 वर्ष बाद यानी 2014 में ही दो बड़ी कंपनियां lightspeed Venture Partners और DSG Consumer Partners ने Oyo Rooms में 4 करोड़ों रुपए का निवेश किया। फिर 2016 में जापान की बहुराष्ट्रीय कंपनी soft bank नेवी करीब 7 करोड़ रुपयों का निवेश किया जो कि एक नई कंपनी के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी।

वह बात जिसने रितेश अग्रवाल को कंपनी को और आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है वह है हर महीने ग्राहकों द्वारा 10000000 रुपए से भी ज्यादा की की जाने वाली बुकिंग। आज मात्र 2 वर्षों में Oyo Rooms 15000 से भी ज्यादा होटलों की श्रंखला के साथ देश की सबसे बड़ी आराम दें एवं सस्ते दामों पर लोगों को कमरा उपलब्ध कराने वाली कंपनी बन चुकी है। रितेश अग्रवाल की यह कंपनी भारत के शीर्ष स्टार्टअप कंपनियों में से एक है। विश्वास कंपनी ने मलेशिया में भी अपनी सेवा देना प्रारंभ कर दिया है और आने वाले समय में अन्य देशों में भी वह अपनी पहुंच बनाने जा रहे हैं।

5 thoughts on “(Inspirational Story) एक 20 वर्ष के लड़के ने खड़ी की करीब 360 करोड़ की बिजनेस।

  1. You imply like when we sing praise songs in Church??
    Larry requested and daddy nodded. ?Properly I could make up a worship song.?
    So Larry jumped to his ft and began to make up a music to a very bad tune.
    ?Jesus is so cool. Its fun being with God. He is
    the funnest God anyone could have.? Larry sang very badly so Lee had put his
    hands over his ears.

  2. If you are the type of person who is less than thrilled
    with the prospect of working in the same workplace, day after
    day, eliminating this type of routine is among the most necessary highlights which you could
    receive from freelancing. When you hire your self out as a freelancer, each job project that you take
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