Inspirational Story: मुट्ठी भर मेंढक

प्रेरणादायक कहानी

दोस्तों ऐसा कई बार होता है कि हम लोगों द्वारा की गई आलोचनाओं के चलते दुखी हो जाते हैं। और अत्यधिक निराशा और अपना आत्मविश्वास खो बैठते हैं।

आज मैं जो आपको कहानी सुनाने जा रहा हूं उसे सुनकर आप अपना सोच बदल देंगे।

मुट्ठी भर मेंढक

बहुत समय पहले की बात है एक गांव में राजा नाम का एक किसान रहता था। वह बड़ी मेहनत और ईमानदारी के साथ रहता था। अपने अच्छे व्यवहार के कारण दूर-दूर तक उसे लोग उसे जानते थे और उसकी प्रशंसा करते थे। लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि, जब वह अपने खेतों में देर शाम तक काम करके लौट रहा था तभी उसने कुछ लोगों को बात करते हुए सुना वह लोग उसके बारे में बात कर रहे थे।

राजा अपनी प्रशंसा सुनने के लिए उन्हें बिना बताए धीरे धीरे से झाड़ियों के पीछे जाकर उनकी बातें सुनने लगा, जब झाड़ियों के पीछे से उनकी बातें सुन रहा था तो उसने पाया कि वह लोग उसकी बुराई कर रहे थे, उन लोगों में से कुछ तो कह रहे थे कि,” राजा घमंडी है”, तो कोई कह रहा था की,” सब जानते हैं वह अच्छा होने का दिखावा करता है”।

राजा ने अब तक सिर्फ अपनी प्रशंसा सुनी थी पर इस घटना का उसके दिमाग पर बहुत बुरा असर पड़ा और अब वह जब भी कुछ लोगों को बातें करते देखता तो उसे लगता कि वह उसकी बुराई कर रहे हैं। यहां तक कि अगर कोई उसकी तारीफ करता तो भी उसे लगता कि उसका मजाक उड़ाया जा रहा है। धीरे धीरे सभी यह महसूस करने लगे कि राजा में बदलाव आ गया है, और उसकी पत्नी भी अपने पति के इस व्यवहार में आए बदलाव से काफी दुखी रहने लगी और एक दिन उसने पूछा,” आजकल आप इतने परेशान क्यों रहते हैं?”, कृपया मुझे इसका कारण बताएं”।

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राजा ने उदास होते हुए उस दिन की बात बता दी। अब पत्नी को भी समझ में आया कि क्या किया जाए पर तभी उसे ध्यान आया कि पास के ही एक गांव में एक सिद्ध महात्मा आए हुए हैं, वही इस समस्या का हल बता सकते हैं। राजा की पत्नी ने कहा कि,” स्वामी मुझे पता चला है कि पड़ोस के एक गांव में एक पहुंचे हुए संत आए हैं। चलिए हम उनसे कोई समाधान पूछते हैं”।

अगले दिन ही राजा और उसकी पत्नी सिद्ध महात्मा के शिविर में जा पहुंचते हैं।

राजा ने सारी घटना महात्मा जी को बताएं, महाराज कुछ दिन के बाद से सभी मेरी बुराई और झूठी प्रशंसा करते हैं, कृपया मुझे बताइए कि मैं वापस अपनी साख कैसे बना सकता हूं?

इस प्रश्न का उत्तर देते हुए महात्मा जी ने कहा,” पुत्र तुम अपनी पत्नी को घर छोड़ आओ और आज रात मेरे शिविर में ठहरो”।

इसके बाद राजा ने ऐसा ही किया, पर जब रात में सोने का समय हुआ तो अचानक ही मेंढक ओके टर्र टर्र की आवाज आने लगी।

मेंढक को की टर्र टर्र की आवाज से परेशान होकर राजा ने महात्मा जी से कहा,” यह क्या महाराज यहां इतना कोलाहल शोर शराबा मचा हुआ है”। तब महात्मा जी ने इस सवाल का उत्तर देते हुए कहा,” पुत्र, पीछे एक तालाब है, रात के वक्त उसमें मौजूद मेंढक अपना राग अलापने लगते हैं!!!” तब राजा ने अपनी चिंता जताई और महात्मा जी से कहने लगा,” पर ऐसे में तो कोई यहां सो नहीं सकता???

तब महात्मा जी ने कहा कि,” हां बेटा, पर तुम ही बताओ हम क्या कर सकते हैं? हो सके, तो तुम हमारी मदद करो”

तब राजा ने कहा कि,” ठीक है महाराज, इतना शोर सुनकर लगता है कि पीछे के तालाब में बंदूकों की संख्या हजारों में होगी, मैं कल ही गांव से 50-60 मजदूरों को लेकर आता हूं और इन्हें पकड़ कर दूर नदी में छोड़ आता हूं”।

और अगले ही दिन मोहन सुबह सुबह मजदूरों के साथ वहां पहुंचा, महात्मा जी विवाह खड़े सब कुछ देख रहे थे।

तलाब ज्यादा बड़ा नहीं था, 8-10 मजदूरों ने चारों ओर से जाल डाला और मेंढकों को पकड़ने लगे…. थोड़ी देर ही मैं मेहनत में सारे मेंढक पकड़ लिए गए। जब राजा ने देखा कि कुल मिलाकर के 50-60 हे मेंढक पकड़े गए हैं तब उस ने महात्माजी से पूछा,” महाराज, कल रात तो इसमें हजारों मेंढक थे, भला आज वह सब कहां चले गए, यह तो बस मुट्ठी भर मेंढक ही बचे हैं”।

तब महात्मा जी गंभीर होते हुए बोले,” कोई मेंढक कहीं नहीं गया, तुमने कल इन्हीं मेंढक की आवाज सुनी थी, यह मुट्ठी भर मेंढक ही इतना शोर कर रहे थे कि तुम्हें लगा कि हजारों मेंढक टर्र टर्र कर रहे हो। पुत्र, ठीक इसी प्रकार जब तुमने कुछ लोगों को अपनी बुराई करते सुना तो तुम्हें भी यही गलती कर बैठे, तुम्हें लगा कि हर कोई तुम्हारी बुराई करता है। पर सच्चाई यह है कि बुराई करने वाले लोग मुट्ठी भर मेंढक के समान ही थे। इसलिए अगली बार किसी को अपनी बुराई करते सुनना तो इतना याद रखना कि हो सकता है कि यह कुछ ही लोग हो जो ऐसा कर रहे हो, और इस बात को भी समझना कि भले तुम कितने ही अच्छे क्यों ना हो ऐसे कुछ लोग होंगे ही जो तुम्हारी बुराई करेंगे”।

अब राजा को अपनी गलती का एहसास हो चुका था, वह पुनः पुराना वाला राजा बन चुका था।

दोस्तों, राजा की तरह ही हम भी कुछ लोगों के व्यवहार को हर किसी का व्यवहार नहीं समझ लेना चाहिए, महात्मा जी द्वारा दिए गए शिक्षा से हमें यह सबक लेना चाहिए कि हम कुछ भी कर ले पर लाइफ में कभी ना कभी ऐसी समस्या आ ही जाती है, कि भले ही हम कितना अच्छा काम क्यों ना कर ले। लेकिन रात में टरटर करते हुए मेंढकों की तरह ही हमारे बारे में बुराई करने वाले लोग भी जरूर मौजूद रहते हैं।

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