Panspermia Theory: के मुताबिक मनुष्य इस धरती पर एलियन है।

रहस्यमय तथ्य

ऐसे तो जीवन की उत्पत्ति को लेकर कई धारणा है बनाई गई है। मनुष्य की उत्पत्ति इस धरती पर हमेशा से रहस्य ही बना है। Panspermia थ्योरी के अनुसार मनुष्य की उत्पत्ति किसी दूसरे ग्रह से हुई है।

पृथ्वी पर जीवन का विकास कैसे हुआ या निश्चित रूप से बता पाना एकदम कठिन है। विज्ञानिकों ने हमारी धरती की उम्र लगभग 4 अरब 50 करोड़ लगाई है। इस दृष्टि से देखा जाए तो पृथ्वी पर जीवन का विकास की कहानी करोड़ों वर्ष पुरानी है। जीवन की उत्पत्ति एक रोचक घटना है ब्रह्मांड अत्यंत विशाल है तथा पृथ्वी उसके सामने एक छोटा सा कण के मात्र है। पृथ्वी का निर्माण बिग बैंग थ्योरी के अनुसार गैसों के आपस में गुरुत्वाकर्षण के कारण टकराने से संघन होने के कारण हुआ। इसके साथ ही हमारे आकाशगंगा का निर्माण हुआ। पृथ्वी के निर्माण के बाद कई लाखों वर्षों तक पृथ्वी वीरान सी रही, और धीरे-धीरे इसमें एक कोशिकीय जीवों का निर्माण हुआ। वैज्ञानिकों द्वारा शोध किए गए दाँव में तो यही कहा गया है कि विभिन्न जीवो का निर्माण एक कोशिकीय जीव से ही हुई है। जीवन की उत्पत्ति के बारे में विज्ञानिकों के कई मत है जिनमें से मुख्य इस तरह है:-

  1. Sure spore Principle ( सियोर बीजाणु सिद्धांत) :- Panspermia
  2. Auto Birth Principle ( अपने आप स्वत: जनन सिद्धांत)
  3. जीवन ज्योवोपति का सिद्धांत( The Theory of life Biogenesis)
  4. The principle of Chemical Development( रासायनिक विकास का सिद्धांत)

वैज्ञानिकों द्वारा इन सब कारणों के कारण पृथ्वी पर जीवन का विकास और उनकी उत्पत्ति होने का कारण माना जाता रहा है। यह चारों वह मत है, जिसे विज्ञान भी यह मानता है कि इन कारणों से धरती पर जीवन की उत्पत्ति हो सकती है। पृथ्वी पर सबसे पहले अत्यंत सूक्ष्म प्राणियों का जन्म हुआ, जिनका स्वरूप लासलसी झिल्ली के समान था। ऐसी जीवो में खाल या हड्डी नहीं थी तथा इनका विकास समुद्र के किनारे के छेछले पानी में हुआ था। ऊपर दिए गए चारों थ्योरी के बारे में हम लोग नीचे विस्तार से वर्णन करेंगे।

  1. Sure spore Principle ( सियोर बीजाणु सिद्धांत) :- Panspermia

Panspermia एक ग्रीक शब्द है जिसमें Pans का अर्थ होता है ‘सब’ और Permia का अर्थ होता है जीवाणु या विषाणु। इस थ्योरी के अंतर्गत ऐसा माना जाता है कि जीवन का विकास पृथ्वी से बाहर उपस्थित अंतरिक्ष धूल द्वारा वितरित ,उल्का पिंड ,छुद्र ग्रह, धूमकेतु या किसी अंतरिक्ष यान द्वारा सूक्ष्म जीवो को पृथ्वी पर लाए जाने से हुआ है।

कई विज्ञानिक यह भी मानते हैं कि धरती से पहले किसी अन्य ग्रह पर जीवन का विकास हुआ था। छुद्र ग्रह और अन्य उल्कापिंडों पर या सूक्ष्म जीव के रूप में इस धरती पर आए और इन्हीं सूक्ष्म जीवों से जीवन की उत्पत्ति हुई। इससे हम यह कह सकते हैं कि मनुष्य खुद इस धरती पर एलियन की तरह आर निवास करता है।

2.Auto Birth Principle ( अपने आप स्वत: जनन सिद्धांत)

पृथ्वी का जन्म आज से 4.5 वर्ष पहले हुआ था। हम यह मान सकते हैं कि पृथ्वी की सतह पर जीवन का विकास पहले 1 अरब वर्ष में ही हो गया था। सबसे प्राचीन ज्ञात जीव सूक्ष्म तथा आकृती हीन थे। पुरातत्व द्वारा पुराने चट्टान के अध्ययन से ज्ञात हुआ है कि बैक्टीरिया के जीवाश्म 3.5 से 3.8 अरब वर्ष पुराने हैं। जीवन का सबसे प्राचीन प्रमाण सूक्ष्म जीवाणुओं के रूप में मिलता है जो अत्यंत सूक्ष्म जीवों के अवशेष है। यह सूक्ष्म जीव वर्तमान काल के दरिया के जैसे थे जिनका आकार एक से 2 माइक्रोमीटर था। यह यह सूक्ष्म जीव एककोशिकीय बिना किसी बाहरी आकृति के या आंतरिक संरचना वाली जीवित है।

वैज्ञानिकों द्वारा यह भी कहा गया है कि यह सूक्ष्म जीव पृथ्वी में होने वाले बदलाव रासायनिक और गैसीय बदलाव के कारण स्वता ही इस धरती पर जन्म में होंगे। सरल शारीरिक रचना वाले जीवो को Prokaryotes कहा जाता है। जो कि एक ग्रीक शब्द है और यह शब्द पहले तथा केंद्र के अर्थ वाले शब्दों से बना है। शोध के जरिए यह पता चला है कि इन के जीवाश्म का उद्भव अभी से 1.5 अरब वर्ष पहले नहीं हुआ था। इसका अर्थ है कि पृथ्वी पर पहले 2 अरब वर्ष पहले केवल बैक्टीरिया का ही अस्तित्व था।

पृथ्वी पर सबसे प्राचीन बैक्टीरिया, आर्क बैक्टीरिया की उत्पत्ति

अभी तक विज्ञानिक यही मानते आए हैं कि इस धरती पर सबसे प्राचीन बैक्टीरिया आर्क बैक्टीरिया ही है। पृथ्वी के उत्पत्ति के शुरुआती समय में गर्म जल के झरनों के उबले पानी में तथा गहरे समुद्री ज्वालामुखी छिद्रों के आस-पास बिना ऑक्सीजन वाली जगहों पर यह बैक्टीरिया उत्पन्न हुए होंगे। यह सरल संरचना वाले हैं और ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में भी जीवित रह पाते हैं। ऑक्सीजन इन के लिए जहर है। यह प्राचीन प्रारंभिक जीव है लेकिन अन्य सभी बैक्टीरिया जैसे ही हैं इनमें DNA वसायुक्त कोशिका भित्ति बाहरी कोशिका भित्ति तथा ऊर्जा आधारित चयपचाय क्रिया होती है।

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